Sunday, August 10, 2014

दिल हुआ जाता है मजबूर तुझ से बात करे

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दिल हुआ जाता है मजबूर..........तुझ से बात करे,
बात बस इतनी कि तू..........खुद ये शुरूआत करे |

गुज़रे हैं बाद तिरे लोग.............बहुत दिल से मेरे ,
पर कोई तुझ सा नहीं............रह-गुज़र साथ करे |

जाने क्यूँ आँखों में हर पल........रहे रौशन-रौशन,
अब शिकायत है ये कुदरत से......क्यूँ वो रात करे |

अब तो लरजे है तसव्वुर में........बदन तेरा सनम,
और जज़्बात सारी रात...........अब सवालात करे |

दिन थे क्या शहर-ए-बदन तक की खबर रखते थे,
अब तो मुश्किल हुआ इतना......कि मुलाकात करें |
______________हर्ष महाजन