Friday, August 15, 2014

ये बदलियाँ जो छोटी-छोटी, ज़िन्द पे छाई हैं

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ये बदलियाँ जो छोटी-छोटी, ज़िन्द पे छाई हैं,
हैं कुछ तो गम ये....और कुछ मेरी तन्हाई है |
मिले जो इतने निशाँ..खुद सितम बतलायेंगे,
नहीं भूला उनको आज..जिनकी रहनुमाई है | 

______________हर्ष महाजन