Wednesday, August 27, 2014

जुबां पर अभी थे, अब जाने किधर हैं



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जुबां पर अभी थे.. अब जाने किधर हैं ,
ये लफ्ज़-ए-महोब्बत ...हुए दर-बदर हैं
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उधर तू भी चुप है इधर मैं भी चुप हूँ ,
ऐ दिल दोस्तों में......ये कैसा सफ़र है |



न रिश्ता कोई अब.....दिया है न बाती, 
मगर जल रहा है...तो किसका हुनर है |

 
मिले न कभी दिल भी धड़का न लेकिन,
मुझे उसका, उसको मेरा क्यूँ फिकर है |


वो खुश ज़िन्दगी में,मैं खुश हूँ मगर क्यूँ,
अब हर बात में जाने उसका ज़िकर है |
 


___________हर्ष महाजन