Saturday, November 15, 2014

उनकी मुहब्बत को अपने शेरों में पिरो दिया

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उनकी मुहब्बत को...... अपने शेरों में पिरो दिया,
बे-तकल्लुफी की मैंने....कहा उसने और रो दिया |
यही बहुत था मेरे लिए....अपनी मंजिल का पता,
दिल को निकाल कागज़ पर...अश्कों से धो दिया |

___________________हर्ष महाजन