Friday, November 14, 2014

किस तरह रोकूँ मैं ये हिचकियाँ अब ‘हर्ष’

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किस तरह रोकूँ मैं ये हिचकियाँ अब ‘हर्ष’
मुझसे इतना प्यार......सम्भलता नहीं है |
मेरे आखिरी वक़्त का......ख्याल तो करो,
तंग गलियों से..ज़नाज़ा निकलता नहीं है |

_______________हर्ष महाजन