Sunday, November 23, 2014

गर इस दर्द को जान ही गए हो तुम 'हर्ष'


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गर इस दर्द को जान ही गए हो तुम 'हर्ष'
तो इस दर्द को मैं....भुलाना नहीं चाहता |


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Gar is dard ko jaan hi gaye ho tum 'harash'
To is Dard ko maiN Bhulanaa nahiN chahta.



____________हर्ष महाजन