Tuesday, December 23, 2014

मेरे दर पर तो इश्क बे-शुमार मगर

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मेरे दर पर है इश्क........बे-शुमार मगर,
अब मुझे खुद ही उसका सहारा न मिला |
वो तो देता रहा...........मैं उलझता रहा,
ऐसा मंज़र मुझे फिर....दुबारा न मिला | 



Mere dar per hai ishq be-shumaar magar,
Ab mujhe khud hi uska sahaara na mila.
Woh toh deta raha maiN ulajhta raha
Kaisa manzar mujhe phir dubara na mila



___________________Harash Mahajan