Thursday, December 25, 2014

बहुत सोचता हूँ गुज़रे लम्हों का कभी सफ़र कर लूं

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बहुत सोचता हूँ गुज़रे लम्हों का कभी सफ़र कर लूं,
मगर फिर अपनी बेवकूफियों का अहसास होता है |

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Bahut sochta huN guzre lamhoN ka kabhi safar kar looN,
Magar Phir apni be-wakoofiyoN ka…..…ahsaas hota hai.



____________________Harash Mahajan