Tuesday, January 27, 2015

गर मोहब्बत पे अपनी मुझको इख्तियार होता

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गर मोहब्बत पे अपनी मुझको इख्तियार होता,
तो तू बेवफा भी नहीं मैं भी न बीमार होता |
दिल की गलियों में अगर इश्क न बेशुमार होता,
आइना-ए-दिल टूटता न टुकड़ों में दीदार होता |


___________हर्ष महाजन
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Gar mohabbat pe apni mujhko ikhtiyaar hota,
Toh ru be-wafa bhi nahiN main bhi na bimaar hota.
Dil ki galiyoN meiN agar ishq na be-shumaar hota,
Aayina-e-dil toot.ta na tukdoN meiN diidaar hota.



___________Harash Mahajan