Wednesday, February 21, 2018

अटूट रिश्ता (नज़्म)

दोस्तो आपकी अदालत में एक नज़्म पेशे खिदमत है उम्मीद है इसे अपने प्यार से ज़रूर नवाजेंगे ।अगर अच्छी लगे तो दो शब्द ज़रूर कहियेगा ।

------------------अटूट रिश्ता (नज़्म)

वो दोस्ती का जज़्बा कभी दिखा न सका,
दुश्मन तो था मगर दुश्मनी निभा न सका ।

कुछ एक फसाने हकीकत में बदले ज़रूर,
मगर जलालत में कुछ भी वो बता न सका ।

इंतिहा-ए-जुदाई-ओ-गम सब सहे उसने,
पर समंदर जो आंखों में था छिपा न सका ।

नाम ले ले कर मेरा बहुत कोसा किये था वो
कितना पागल था नफरत भी जता न सका ।

टूटकर चाहेगा वो ऐसा कभी कहा था उसने,
वो शख्स, जैसा भी था मैं भी भुला न सका ।

-------------------हर्ष महाजन

Tuesday, February 20, 2018

यूँ न आंखों से बातें किया कीजिये


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यूँ न आंखों से बातें किया कीजिये,
इश्क़ का यूँ सबक न दिया कीजिये ।

हम तो नादान हैं प्यार में कुछ सनम,
तुम खबर कुछ तो दिल की लिया कीजिये ।

गम की ग़ज़लें चलें अश्क़ तुम थाम कर,
टूटे दिल को न यूँ ही सिया कीजिये ।

हम तो डरते हैं बदनामी से शहर में,
इश्क का तुम ज़िकर न किया कीजिये ।

गम की गहराइयों से जो गुज़रो कभी,
इल्तिजा अश्क तुम न पिया कीजिये ।

फासला दरमियाँ अब हमारे कहां,
फासलों में सनम न जिया कीजिये ।

जब भी आंखों से टपके नशा प्यार का,
हम नज़र से पिलाएं पिया कीजिये ।

----------------हर्ष महाजन

बहरे-मुतदारिक मसम्मन सालिम
212 212 212 212

1) मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र
जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया

2) हर तरफ़ हर ज़गह बेशुमार आदमी
फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी.

काश आज भी पुराना जमाना होता,


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काश आज भी......पुराना जमाना होता,
तुझ संग मेरा भी....इक अफसाना होता ।
कुछ भी बदल लेते..हाथों की लकीरों में,
पर ज़िन्दगी का सफर खूब सुहाना होता ।

----------------हर्ष महाजन

Monday, February 19, 2018

इश्क़ तक तुझे तैयार करूँ ज़ायज़ नहीं लगता


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इश्क़ तक तुझे तैयार करूँ ज़ायज़ नहीं लगता,
अनचाहा फिर खुमार भरूँ ज़ायज़ नहीं लगता ।
चाहत तो है तेरे हुस्न का दीदार कर लूँ मगर,
दहलीज़ पे इंतज़ार करूँ...ज़ायज़ नहीं लगता ।

----------------हर्ष महाजन

हद से ज़्यादा प्यार करना भी गुनाह हो गया


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हद से ज़्यादा प्यार करना भी गुनाह हो गया,
वो रिश्ता कुछ यूं बना कि घर तबाह हो गया ।

------------------------हर्ष महाजन

Monday, February 12, 2018

फासला रखना हमेशा अच्छे हों जितने ये लोग


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फासला रखना हमेशा अच्छे हों जितने ये लोग,
होती मीठी सी ज़ुबाँ अंदर से ज़हरीले ये लोग ।
मुस्कुराते रहते हैं ये......फूल कांटों संग भी,
ये हुनर सिखला दे कोई क्यूँ हैं पथरीले ये लोग ।

-----------------हर्ष महाजन

ख़्वाबों का सिलसिला क्या बताऊँ ऐ 'हर्ष,



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ख़्वाबों का सिलसिला क्या बताऊँ ऐ 'हर्ष,
हालात-ए-इश्क से बे-खबर लगता है शायद तू |

_______हर्ष महाजन

यूँ ही मुहब्बत में बर्बाद होना किसे अच्छा लगता है


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यूँ ही मुहब्बत में बर्बाद होना किसे अच्छा लगता है,
मगर हौंसिले बुलंद हों तो हर ज़ख्म सुहाना लगता है |

_______________________हर्ष महाजन

इतना भी तो आसां नहीं किसी शेर को कह पाना


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इतना भी तो आसां नहीं किसी शेर को कह पाना,
इक-इक लफ्ज़ मुहब्बत हार कर पिरोना पड़ता है |

___________________हर्ष महाजन

कुछ दर्याफ़्त करना भी अब गुनाह सा लगता है,


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कुछ दर्याफ़्त करना भी अब गुनाह सा लगता है,
भुला दो तुम भी वो लम्हें यही वफ़ा सा लगता है |

___________________हर्ष महाजन