Tuesday, September 6, 2011

रो दिया करती है


देख कर मेरे खतों को अक्सर वो रो दिया करती है
शायद मेरी यादों को मुसलसल वो खो दिया करती है |

Monday, September 5, 2011

हुस्न-ओ-शबाब

हुस्न-ओ-शबाब बिना जिंदगी जहन्नुम है
मुसलसल शराबी के लिए यही बाकी रहा

हर्ष महाजन

सब बदल जाएगा


आज नहीं तो कल सब बदल जाएगा
घर को लगी आग तो सब जल जाएगा।

गिर के संभलना इंसा की फितरत है मगर    
नज़रों से गिरा कभी न संभल पायेगा |

दर्द है तो छिपाओ न इसे दुनियां से
इस भूल पर वो इक दिन पछतायेगा |

न करो प्यार इतना के पछताना पड़े
सब कुछ लुटा के बे-वफ़ा कहलायेगा |

अनजान राहों में चलना समझ-दारी नहीं
लगी ठोकर तो कभी न संभल पायेगा |

हर्ष महाजन

एक लाश




_____रूह चली आज
अपने घर को
छोड़ चली इक
सुरीले स्वर को
_____दूंद्ती है ....
वो मजबूत कांधा
बड़ी महरबानी उनकी
जिन्होंने
जिस्म को
मजबूती से बाँधा........!!!!

_______क्या इसलिए..????
कहीं ये उठ न जाए ...?
या यूँ  कहिये.......
-----गणित कहीं ......
जायदाद- खोरों का !!!
बिगड न जाए !!!!!

____शीघ्रता छा जाए....!!!
सिर्फ रोने का शगुन भर
रह जाए  !!!!!
सब की नज़रें ....
उस बे-जान लाश पर ..
जो पड़ी है यूँ ही
अपनों के विश्वास पर !!!
रूह उसकी टहल रही है
सुन रही है
अपनों के ताने-बाने ...!
बुन रहे हैं जो
रहे थे कभी........
जाने पहचाने और सयाने .....
पुकार रहे हैं
उस बे-जान पड़ी लाश को 
____अरे ओ ~~~~~
कहाँ छुपा रखा है ?
करारनामा !!!!
बड़ा ही खूंसठ था ये बुड्डा
बड़ा ही था खिस्याना ~~~
जाते हुए भी
नहीं बता गया
उसका ठिकाना ?
बे-रहम ...बे-हया !!

___________बीवी गुर्रायी
इधर-उधर देख चिल्लायी ~~~~
ज़रा जल्दी करो !!!!!!
लाश पेट से फूल आयी!!!!!
_____बाद में समझ आयी
उसे तो बिलकुल ...उदास और
.....चुप रहना है |
वो भूल गयी थी
इक पति-व्रता इस्त्री का
यही तो  इक गहना है ...!!

____रूह ने ली
इक बे-जान सी अंगडाई .....
इक बूँद  !!!!!
सूक्ष्म आँखों से
खुद-ब-खुद
चली आयी

इक बूँद  !!!!!
सूक्ष्म आँखों से
खुद-ब-खुद
चली आयी |
________________




हर्ष महाजन

____ग़ज़ल



दोस्तों से अनचाहे प्रश्न  करने लगा है
ये मंच मुझे अजनबी  लगने लगा है |

जुबां जो कभी चुप न थी अब खामोश है
ये सिलसिला दिल पत्थर करने लगा है |

ख्यालों में तस्वीर नज़र आती है उनकी
दिल  बे-सबब दीवारों पे चलने लगा है |

वादा किया, और निभाएगा ये कहा उसने 
क्या मालूम नयी चाल से छलने लगा है |

उनकी बातें जहरीले तीरों से कम न  थी
यूँ  लगा "हर्ष" जहन्नुम में पलने लगा है |

_________हर्ष महाजन

Sunday, September 4, 2011

वो ज़ख्म दिए चले

प्यार मैं उनसे इस कदर करता चला जाऊं
वो ज़ख्म दिए चले जाएँ मैं भरता चला जाऊं
उनकी ये जिद्द के वो मुझे मार ही डालें
मेरी ये जिद्द के उनपे मरता चला जाऊं |

हर्ष महाजन

बे-अदब

टूट के बिखर जाना कोई सबब नहीं
तू मेरा दोस्त है कोई बे-अदब नहीं |

चाहता तो बहुत हूँ

तू बहुत उदास है
तुझे अब मनाऊँ कैसे
चाहता तो बहुत हूँ
पर दोस्त 
तुझे
हाथों की लकीरों में
सजाऊँ कैसे !!!!!!!!

हर्ष महाजन

_______ग़ज़ल



मैं भयानक कवितायें पढ़ने लगा हूँ
पर अपने साये से भी डरने लगा हूँ |

है कोई खुदा यहाँ जो मुझे उठा सके
मैं अमर हूँ अहसास करने लगा हूँ |

इशारों पर चलना समझदारी तो नहीं
पर मैं तो नींद में भी चलने लगा हूँ |

प्यार में हद से गुजर जाना ठीक नहीं
मैं खुद किसी की आँखों में पलने लगा हूँ |

मुश्किल से उसको दर्द में हसाया मैंने
मैं खुद अब उस  दर्द से गुजरने लगा हूँ |

__________हर्ष महाजन

Saturday, September 3, 2011

क्यूँ मिली तुम

क्यूँ मिली तुम मुझे इस तरह राहों में
न खतम होने वाले सिलसिले हैं हम |

Friday, September 2, 2011

कारवाँ दर कारवां है जिंदगी

गज़ल
ख्वाब गर आंखों में हैं तो फिर जवां है जिंदगी
खिल सके न गुल तो पूछो तू कहाँ है जिंदगी
राम जाने क्यूँ किसी ने किस बिना पे कह दिया
हाद्साते कारवाँ दर कारवां है जिंदगी |

जिंदगी जिंदा दिली का नाम होता था कभी
आजकल क्यूँ आंसुओं की दास्ताँ है जिंदगी |

जिंदगी के रास्तों में फूल भी और ख़ार भी
जानकर भी हर वफ़ा की इम्तिहां है जिंदगी |
जब खुदा ने खींच दीं हैं कुछ लकीरें हाथ में
अब फकत इक दासता के दरमियाँ है ज़िंदगी |
 


__________हर्ष महाजन

Thursday, September 1, 2011

Janam din

_________Janam-Din-Mubarak___________


Tere janam-din pe tujhe aaj maiN kya pesh karooN
Dil ke jazbaat hi sochta hooN tujhe pesh karooN

Aaj bas hai nahiN kuchh paas meri bitia ke liye
Par ye  baabul ka simta pyaar tujhe pesh karooN

Pal jo Gujare the tere saath  bachhoN ki tarah
Sochta hooN wahi lamhaat tujhe pesh karooN

Kal ko hum hoN ke na hoN yaad tum rakhna isey
bhool na jaana jo alphaas tujhe pesh karooN

Ye "Harash" Deta tujhe shubhkaamna Neelam ke saNg
Woh bahaareiN bina patjhar ke tujhe pesh karooN.
Harash Mahajan

Sunday, August 28, 2011

इक अंदाज़

प्यार करने वालों का अपना इक अंदाज़ होता है 
जिधर भी होता है इक बे-वफ़ा साथ होता है |
जज्बातों  से खेलना उनकी आदत ही सही मगर
प्यार करने वालों का बस वफ़ा ही साज़ होता है |



Friday, August 26, 2011

_____________दो दो लोकतंत्र



उठो साथियो आज हमें इक नया इतिहास बनाना है
अन्ना के इस लोकपाल को संविधान में लाना है |
लुट रहा है देश हमारा पहरेदार इसे लूट रहे
इक-इक करके इन चोरों को इनका मुकाम दिखाना है |

प्रजातंत्र की आड़ में जो तानाशाही हैं कर रहे
इनके चंगुल से हमने अब हिन्दुस्तान छुड़ाना है |
पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सब राजनैतिक दलों का निशाना है
लोकतंत्र के माध्यम से ही लोकतंत्र कब्ज़ाना है |

दो दो लोकतंत्र देश में आमने सामने लड़ रहे
पहचानों जन-लोकपाल संग, जो धीरे-धीरे बड रहे |
सत्ता मर्यादा खो रही है विपक्ष भी इसको ढो रही है
अन्ना के इस लोकपाल के राह में कांटे बो रही है |

उठो सवेरा हो गया है सरकारी मत सो गया है
इक-इक दिल में  नया बीज अब देश भक्ति का बो गया है
गर अन्ना जी का लोकपाल बिल संसद में चलवाना है
  इक इक नागरिक ये प्रण ले ले सत्याग्रह निभाना है |

____________हर्ष महाजन

Wednesday, August 24, 2011

Aise saksh khel rahe desh meiN

Aise saksh khel rahe desh meiN
Manmaani thhel rahe desh meiN
Bhagat sukhdev ya ho sawarkar
Insult unki sab jhel rahe desh meiN>>

nahiN maane Nge ye Bhrashtchaari
Jba tak na saheNge ye mara-maari
Ye shabdoN ki baasha tol rahe haiN
Apni hasti khol rahe haiN

Utho saathhiyoN bhrashtachaari hata do
Jala do mashaaleiN atyachaari mita do
Bigul baja do Doulat baha do
Pet per apne Tala laga do......

Anna ki bhookh se bhookh mila do
Anna ki bhookh se bhokh mila do

_____harash Mahajan

ये संविधान हमारा है क्यूँ संसद ने नकारा है


संसद की बुनियाद आज इस तरह हिलने लगीं
जिस तरह गिरगिट यहाँ अपना रंग बदलने लगीं |

दिख रहा है वो धुंआ अब तक कहीं उठा नहीं
नहीं दिखेगी आग वो जिस तरह जलने लगी |

हर गली हर मोड पर हर सड़क हर गाँव में
धधक उठी मशालें वो जो खुद-ब-खुद चलने लगीं |

ये संविधान हमारा है क्यूँ संसद ने नकारा है
अन्ना के आन्दोलन में सरकार क्यूँ भिड़ने लगी |

इतना भ्रष्टाचार हुआ है संसद का अकार हुआ है
लोकपाल के नाम पर संसद क्यूँ डरने लगी |

हर्ष महाजन

भ्रष्टाचार



भ्रष्टाचार को खींच कर धरती पे टिका दो साथियो
भ्रष्टाचारी जो मिले मिटटी में मिला दो साथियो |
पग-पग भर दो मैदानों में जहां कोई कण खाली हो  
अपने जोशीले नारों से संसद हिला दो साथियो |

अभी तो खेल रहे शब्दों से इतना न मजबूर करो
निकल पड़ें न तलवारें इनको बतला दो साथियों |
काँप उठेंगी हवाएं तक जब अन्ना करवट बदलेंगे
तब याद करेंगे आज़ादी इनको दिखला दो साथियो |

जन-लोकपाल बिल आज भी पत्थरों में पल रहा
क्या खून पानी हो गया इनको बतला दो साथियो |
चौसठ साल की पारी खेल भारत फिर गुलाम हुआ
आज़ादी किस तरह मिली थी इनको बतला दो साथियो |

खींच लो अपने घरों से इक-इक को मैदानों में
दिखला दो तुम ताकत सबकी अपनी मिला के साथियो
भारत, भारत रहा नहीं अब, बंधे-मातरम कहाँ गया
भारत माता के नारों से इनको हिला दो साथियो |

    जय हिंद ------ जय भारत


हर्ष महाजन

Monday, August 22, 2011

सिंहासन अब हिल उठे हैं अन्ना तेरी बारी है



सिंहासन अब हिल उठे हैं अन्ना तेरी बारी है
भ्रष्टाचारी सिस्टम पर बस लोकपाल अब तारी है |
भूल गए आज़ादी जो कीमत नहीं पहचानी थी
भारत के जन-जन में काबिज अब भी वही जवानी थी |

सातवीं शब् अब आ गयी है पेट अन्ना का खाली है
मोनी बाबा के मुहँ पर अब भी लगी इक ताली है |
आज सिस्टम की खातिर हमने ऐसी संसद पाली है
जिनके पेट भरे हैं लेकिन ऊपर सब कुछ खाली है |

सांसद टीवी देख रहे हैं जन-जन सडकें घेर रहे हैं
नकली वादे भेज-भेज कर आम जनता को छेड़ रहे हैं |
जनता की सहनशीलता को, कब तक ये ललकारेंगे
कल तक कलम चलाई जिसने फिर तलवार निकालेगें |

कण-कण में अवसाद हुआ है घर घर में अब शोर मचा है
जब जब सत्याग्रह हुआ है तब-तब इक इतिहास रचा है
भुझ जाएगा दीप भ्रष्टों का गर लोकपाल से खेलेंगे
गर अवसर खो दिया संसद ने इक नया इतिहास वो झेलेंगे |

हर्ष महाजन

Sunday, August 21, 2011

संभल न पाए राज तो ये राज बदल डालो

संभल न पाए राज तो ये राज बदल डालो
 ये संसद हुई बे-आवाज तो सर-ताज बदल डालो |

न-दे जो पुख्ता लोकपाल उस सरकार का क्या करना

अन्ना की बन आवाज ये आवाज़ बदल डालो |

लाखों दिलों की धड़कन को  मुस्कान न दे पाए

बे-सुर हुए जब साज़ तो, वो साज़ बदल डालो |

दुश्मन अब मैदान में जो खेल खेल रहा है

अन्ना तुम भी खेलो वही, अंदाज़ बदल डालो |

अन्ना तेरे जोश संग "हर्ष" की ये आवाज़ है

गर चाहते हो मंजिल यहाँ, परवाज़ बदल डालो |

हर्ष महाजन


Sambhal na paaye raaj to ye raaj badal daalo
Ye sansad hui be-awaaz, to sar-taaj badal daalo.


Na-de jo pukhta lokpal  us sarkaar ka kya karna
Anna ki ban awaaz , ye awaaz badal daalo



laakhoN diloN ki dadhkan ko muskaan ne de paaye
be-sur hue jab saaz to, wo saaz badal daalo




Dushman ab maidaan meiN,  jo khel khel raha hai
Anna tum bhi khelo wahi, Andaaz badal daalo

Anna tere josh meiN,"harash" ki ye awaaz hai

Gar chahte ho manzil YahaaN, parwaaz badal daalo

Harash Mahajan


युग-युग से पीड़ित देश को यारो "हर्ष " का ये नारा है

युग-युग से पीड़ित देश को यारो "हर्ष " का ये नारा है
"चलो दिल्ली चलो दिल्ली" हमें अन्ना ने पुकारा है |

हिंदू मुस्लिम सीख ईसाई सभी है इसमें झूझ रहे
गुमराह हो गयी निति व्यवस्था घोटालों में डूब रहे
निर्बल जनता पर भ्रष्टाचारी निरंकुश अत्याचार करें
रिश्वत बिन कोई काम नहीं न दो तो व्यभिचार करें |
जाग उठो ऐ भारतवासियों,संविधान ही इक सहारा है
"चलो दिल्ली चलो दिल्ली" हमें अन्ना ने पुकारा है |


युग-युग से पीड़ित देश को यारो "हर्ष " का ये नारा है
"चलो दिल्ली चलो दिल्ली" हमें अन्ना ने पुकारा है |

सूझ-भूझ और छल कपट ने संसद को अब यूँ घेरा है
लालू, अमर सिंह सरीके जैसे समिति का अब भेडा है
सारा हिन्दुस्तान देख रहा, सरकार ने अब क्या ठानी है
न समझो निर्बल जनता को अभी जोश इसमें तूफानी है
जाग उठो हो गया सवेरा भ्रष्टाचार नहीं गंवारा है
"चलो दिल्ली चलो दिल्ली" हमें अन्ना ने पुकारा है |

युग-युग से पीड़ित देश को यारो "हर्ष " का ये नारा है
"चलो दिल्ली चलो दिल्ली" हमें अन्ना ने पुकारा है |

भूली नहीं आजादी हमको सुभाष बोस बलिदानी था
सुखदेव भगत और राजगुरु की याद हमें कुर्बानी का
उनकी दी आजादी हमने संविधान से ही चलाना है
अन्ना के जन-लोकपाल को इसलिए तो लाना है |
जाग उठो और पकड़ो मशालें हिन्दुस्तान हमारा है |
"चलो दिल्ली चलो दिल्ली" हमें अन्ना ने पुकारा है |


युग-युग से पीड़ित देश को यारो "हर्ष " का ये नारा है
"चलो दिल्ली चलो दिल्ली" हमें अन्ना ने पुकारा है |