Saturday, April 27, 2013

हैं सुहानी मुलाकातें तेरे क़दमों की कसम

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हैं सुहानी मुलाकातें तेरे क़दमों की कसम ,
तेरे जलवों तेरे जलवों तेरे जलवों की कसम |

तेरी यादों से जो पलकें छलक आयें हैं मेरी,
तेरे हाथों के जो ख़त हैं उनके हर्फों की कसम |

मेरे जलवों पे ये कैसा है कहर बरपा यहाँ,
मेरे महबूब के आँगन में नगाड़ों की कसम |

यूँ ही भूले से भी तुम मेरे शहर आओगे कभी ,
मैं तो दरिया ही बिछा दूंगा यूँ फूलों की कसम |

तूने मुझसे कभी सोचा भी जुदाई का सबब
तेरी ज़िन्द से ही गुज़र जाऊँगा खुदाओं की कसम |

______________हर्ष महाजन |

दर्द होता है तेरी यादों में खोते-खोते

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दर्द होता है तेरी यादों में खोते-खोते,
फूटीं हैं कच्ची कोंपल बीज बोते-बोते |

ऐ नसीबा मैं तुझे कैसे भूल पाऊंगा,
बीती है उम्र सर-ए-आम रोते-रोते |

कैसे बच पाऊँगा ऐसी कलियों से मैं,
खिलती है रोज़ ही जो शाम होते-होते |

अलविदा कहता हूँ, अश्क गिरा देती है,
रोज़ रह जाता है ये, जाम होते-होते |

दिल था वीरान मगर महक बाकी थी अभी,
मैं तो मरता हूँ यहाँ रोज़ सोते-सोते |

लोग कहते हैं मुझे, तू ही भंवरा है ‘हर्ष’
कब तलक जीऊँगा ये इल्जाम ढोते-ढोते |

___________हर्ष महाजन

Thursday, April 25, 2013

मुझसे रुठोगे अगर तुम तो किधर जाऊंगा

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मुझसे रुठोगे अगर तुम तो किधर जाऊंगा,
मैं तो आईना तेरा टूटा तो बिखर जाऊँगा |

कुछ तो होती है खलिश चेहरा बदलने वाले,
दिल में चाहत तो रहेगी मैं जिधर जाऊँगा |

लोग कहते हैं नशा गम को भुला देता यहाँ,
अब जो मैखाना मिलेगा मैं उधर जाऊँगा |

रौशनी देती शमा खुद को जला देती मगर,
यूँ वफ़ा सबसे निभाओगे किधर जाऊँगा |

मैंने वादा है किया खुद से मुस्कुराने का ,
गर मिलन होगा यूँ गैरों से सिहर जाऊँगा |

_____________हर्ष महाजन

Sunday, April 21, 2013

अपने जज्बातों से मेरी कलम को विस्तार न दे

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अपने जज्बातों से मेरी कलम को विस्तार न दे,
सुंदर रिश्ते हैं संगदिल शब्दों से इनमे खार न दे |
बड़ा आसां है 'हर्ष' दिलों का शीशे सा तड़क जाना,
इन्हें बे-सबब जहरीली तोहमतों से रफ़्तार न दे |

__________________हर्ष महाजन

Wednesday, April 17, 2013

मेरे ज़ख्मों में तेरे होने का अहसास है अब

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मेरे ज़ख्मों में तेरे होने का अहसास है अब,
ये भी खामोश तसव्वुर है कि तू पास है अब |

तुझको देखा है कई बार दिल के टुकड़ों में,
मैं हूँ ज़िंदा तेरे आने की मुझे आस है अब |

मुझमें धडके जो दिल उसपे अख्तियार नहीं ,
ज़िन्दगी बोझ लगे साँसें भी उदास है अब |

मेरे गम ही मुझे देते हैं सहारा हरपल
बिखरी उम्मीदें वही मेरे लिए ख़ास है अब |

कशमकश है ये अजब तेरे लिए है ये ग़ज़ल,
राख जो हो के मिला दिल भी मुझे रास हैं अब |

______________हर्ष महाजन

Monday, April 15, 2013

मेरी तुझसे जो मोहब्बत है कोई आम नहीं


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मेरी तुझसे जो मोहब्बत है कोई आम नहीं,
तेरे खत पढ़ न सकूं ऐसी कोई शाम नहीं |

मैंने ढूँढा है फकत तुझको सितारों में सनम,
पर इन हाथों की लकीरों में कोई नाम नहीं |

पलकों तक अश्क कोई गम में भी लाया न करो,
ये वो मोती हैं सनम जिनका कोई दाम नहीं |

गर जुदा रह के खुश तू, मैं भी चला जाऊँगा,
तेरे बिन दुनिया में मेरा भी कोई काम नहीं |

क्यूँ न मैय्यत मे जलाऊँ तेरी यादों के चिराग,
जहां भी देखेगा ऐसा कोई गुलफाम नहीं |

____________हर्ष महाजन

Sunday, April 14, 2013

न रहे तेरी जुबां पर किसी अब गैर का नाम

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न रहे तेरी जुबां पर किसी अब गैर का नाम,
तुझे ऐतराज़ बता देना, किसी ज़हर का नाम |

दिल की बस्ती में बसेगा, तेरा मेरा जो ये गाँव,
गर तू परेशान बता देना, किसी शहर का नाम |

सैलाबे इश्क है आँखों में, तू खामोश है क्यूँ
रेत दे दिल तू मेरा या बता, किसी नहर का नाम |

तेरी अखियों के समंदर में, अब पतवार नहीं
ठेल साहिल पे मुझे या बता, किसी लहर का नाम |

मेरे नसीब में ये लुत्फ़ अब मैयत में सही
जो रहेगा तेरे नाम संग, किसी अब गैर का नाम |

___________हर्ष महाजन

इस तरह छुपा ली सिलवटें अपने चेहरे की

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इस तरह छुपा ली सिलवटें अपने चेहरे की,
चार-दिवारी रंग ली लाज रख ली सेहरे की |
,
___________हर्ष महाजन

Saturday, April 13, 2013

बेवफाई जो बालों पे झलकने लगी थी

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बेवफाई जो बालों पे झलकने लगी थी,
हमने भी बे-रहमी से उसे कुचल डाला |

कैसे छुपायें हम खुदा की इस खुदाई को,
बेशक अजीम रंगों से इन्हें बदल डाला |

____________हर्ष महाजन

Friday, April 12, 2013

HAPPY BIRTHDAY Aastha

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कुछ दिल की यादें खोलो तुम
कुछ लोग बहुत याद आते हैं |
कुछ बीते पलों की  सोचें तो ,
कुछ लोग बहुत याद आते हैं |
अब जाने वो कहाँ-कहाँ पर हैं
एलबम में वो जहाँ के तहां पर हैं |

पर आज के दिन अक्सर ही मुझे,
कुछ लोग बहुत याद आते हैं |

Wishing you all the fun and excitement that only birthdays can bring for you .....HAPPY BIRTHDAY Aastha
GOD BLESS YOU


Harash & Neelam

Wednesday, April 10, 2013

!!!!!जय माता दी!!!! जय माता दी !!!!

!!!!!जय माता दी!!!! जय माता दी !!!!


माँ तुझको देखा ही नहीं,
दे दे तू अब अवतार कभी,
ये दुनिया अजब निराली है,
मिलने न दे तेरा साथ कभी ।....2
माँ तुझको देखा....

जो ज्योत जलेगी तुझसे माँ,
माना दुनिया से रिश्ता गया,
मैं दर-दर तुझको देखूंगा ,
तू दिखा माँ वो फिर द्वार कभी ।....2


माँ तुझको देखा....

तू हर मन जोड़े जगदम्बे,
तेरे प्यार की वर्षा क्या मुझ पे नहीं ?
मैं पापी जुल्मी राही सही
तू हर ले मेरे अब खार सभी।.....2
माँ तुझको देखा....


माँ तुझको देखा ही नहीं,
दे दे तू अब अवतार कभी,
ये दुनिया अजब निराली है,
मिलने न दे तेरा साथ कभी ।
माँ तुझको देखा....

!!!!!जय माता दी!!!! जय माता दी !!!!

___________________हर्ष महाजन


http://harashmahajan.blogspot.in/2012/05/blog-post_09.html
2005
 

जाने इतना कुछ उसने क्यूँ दर्ज कर दिया

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जाने इतना कुछ उसने क्यूँ दर्ज कर दिया,
उम्र भर चाहा जिसे उसे ही क्यूँ मर्ज़ कर दिया |
कितनी नम है ये कलम सब लिखते-लिखते,
जो दिल कभी अपना था क्यूँ क़र्ज़ कर दिया |

____________________हर्ष महाजन

Tuesday, April 9, 2013

अश्क बस बहते रहे इक खार भी सदियों से था

अश्क बस बहते रहे इक खार भी सदियों से था ,
दिल के कौने में मेरे इंतज़ार भी सदियों से था |
फाख्ता हुआ था दिल, उसे गैर दिल में देखकर,
छू रहा था बुलंदियां जो प्यार भी सदियों से था |

____________हर्ष महाजन

Sunday, April 7, 2013

आज इस जहां में हम शहर नया बनायेंगे

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आज इस जहां में हम शहर नया बनायेंगे,
मौत बाद भी जियें, जहर नया बनायेंगे |

धुन चले तो बेबसी में उठ चले रूह कब्र से
साजे दिल से आज हम, बहर नया बनायेंगे |

कट चले दिलों से लोग अजनबी लगे हैं सब,
दुश्मनों के शहर में, शहर नया बनायेंगे |

जब मिले मुझे कभी ,ख्याल आंसुओं में था
फकत अश्क से भरा नहर नया बनायेंगे |

रात भी पसंद न हो ,न चैन दिन में हो कभी,
आज इस फलक पे हम पहर नया बनायेंगे |

__________________हर्ष महाजन

Saturday, April 6, 2013

मुझे मेरे ही अहसास जीने नहीं देते

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मुझे मेरे ही अहसास जीने नहीं देते,
ज़ख्मों के अंबार मुझे पीने नहीं देते |
दर्द जो भूलने लगें चरम मेरे ज़ख्मों की ,
आज वो चादर दिल की सीने नहीं देते |

______________हर्ष महाजन

कर्जा अपनी जात से बनावे इक मिसाल

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कर्जा अपनी जात से बनावे इक मिसाल,
एक से ले दूजे को दे कहलाए उ दलाल |
कहलाए उ दलाल, बनावे मूरख सबको,
मित्र जल्द बनाये, समझ महामूरख उनको |
कहे 'हर्ष' कविराय, जहाँ में लोग हर दर्जा,
कुछ जीयें खुद से, जीयें कुछ ले के कर्जा |

___________हर्ष महाजन

Thursday, April 4, 2013

किस तरह करूँ मैं क़ैद उसे दिल की दीवारों में


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किस तरह करूँ मैं क़ैद उसे दिल की दीवारों में,
वो पंछी आज़ाद घूमें हैं दिल लिए गुब्बारों में |
हर शख्स बुन रहा है इक जाल उसे मनाने को,
कब पहूँचेगी मेरी आवाज़ इन लम्बी कतारों में | 

________________हर्ष महाजन

Monday, April 1, 2013

दिल अब शीशे सा दिखने लगा है

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दिल अब शीशे सा दिखने लगा है,
वफ़ा भूल कई बार बिकने लगा है |
खो चूका है अपना वजूद इस तरह
कि मंडी में कोडियों बिकने लगा है |

______________हर्ष महाजन

Sunday, March 31, 2013

ता उम्र ज़िन्दगी को मैंने गुज़ार दिया करीने से


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ता उम्र ज़िन्दगी को मैंने गुज़ार दिया करीने से,
रख-रख के जाम जी लिया किया परहेज़ पीने से |

नफरत सी हो गयी मुझे अपनों के रंग देखकर,
मगर ज़हां में शख्स कुछ तो अब भी हैं नगीने से|

पढ़-पढ़ के उन खतों को जो न दे सका उन्हें कभी,
  कभी नम हुए हैं अश्कों से कभी नम हुए पसीने से |

वो ख्वाब कुछ ताज़ा हुए और ज़ख्म बन रहें हैं टीस,
मैं कब्र में इस आस में कि उठेगा दर्द सीने से |

फिर सोचता हूँ छोड़ दूं मैं खुद ही अपनी रूह को,
पर क्या करूँ वो दिल में है जिंदा कई महीने से |

________________हर्ष महाजन

Friday, March 29, 2013

बे-गैरतों ने खाई थी, शायद कसम बिछुड़ने की

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बे-गैरतों ने खाई थी, शायद कसम बिछुड़ने की,
हम शिकवों में मशगूल रहे खबर नहीं उजड़ने की |

माना वो हुस्न चाँद सा, हम भी मगर थे कम नहीं ,
हम धड़कने गिनते रहे, खबर न सांस उखड़ने की |

किस तरह जिए हैं हम लिख-लिख के शेर दीवारों पे,
उठा धुंआ तो धड़का दिल,खबर नहीं गुजरने की |

लिख रहे हैं नज्में अब, अपने ही दिल के टुकड़ों पर,
कुछ साँसों की मिली हमें, मोहलत उन्हें कबूलने की |

फलक पे आज लगे है ज़श्न, यूँ  बिजलियाँ कड़क रहीं,
शायद खुदा ने राह दी , अब कब्र में उतरने की |

________________हर्ष महाजन