इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |
Sunday, July 7, 2013
Friday, July 5, 2013
चाँद उतरा जो फलक से, नजर से चूक गया
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चाँद उतरा जो फलक से, नजर से चूक गया,
मेरे दिल में जो भी था प्यार सभी लूट गया |
दर्द उठता ही रहा उनको, मुझ्को इल्म न था ,
जो सितारों से मेरा दिल से था रसूक गया |
_______________हर्ष महाजन
Wednesday, July 3, 2013
आज हम दिल पे लगे ज़ख्मों से आज़ाद हुए
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आज हम दिल पे लगे ज़ख्मों से आज़ाद हुए,
कूच दुनिया से किये हैं मगर फरहाद हुए |
आंधियां खूब चलीं रिश्तों में तूफ़ान हुए,
इश्क था दिल से मगर जिस्म से बर्बाद हुए |
अब तो आजा के फलक पे मेरा है द्वार खुला,
तुम भी शागिर्द हुए हम भी अब उस्ताद हुए |
तुम ही आ जाओ ज़रा मुझ पे ये इल्जाम धरा,
अपने वादे से फिरा, कह दो हम आज़ाद हुए |
हम तो दुनिया की नज़र में हुए बर्बाद मगर,
क़ैद शेरों में किताबों में फिर आबाद हुए |
______________हर्ष महाजन
आज हम दिल पे लगे ज़ख्मों से आज़ाद हुए,
कूच दुनिया से किये हैं मगर फरहाद हुए |
आंधियां खूब चलीं रिश्तों में तूफ़ान हुए,
इश्क था दिल से मगर जिस्म से बर्बाद हुए |
अब तो आजा के फलक पे मेरा है द्वार खुला,
तुम भी शागिर्द हुए हम भी अब उस्ताद हुए |
तुम ही आ जाओ ज़रा मुझ पे ये इल्जाम धरा,
अपने वादे से फिरा, कह दो हम आज़ाद हुए |
हम तो दुनिया की नज़र में हुए बर्बाद मगर,
क़ैद शेरों में किताबों में फिर आबाद हुए |
______________हर्ष महाजन
Tuesday, July 2, 2013
दर्द उठता है रकीबों को भी रकाबत करते
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दर्द उठता है रकीबों को भी रकाबत करते,
दिल में दुश्मन की तस्वीर के टुकड़े जलते |
ख्वाब खामोश से लगते हैं उन्हें क़त्ल हुए ,
ज़िन्दगी ऐसी छली दूजों को छलते-छलते |
रकाबत= दुशमनी
_____________हर्ष महाजन
Monday, July 1, 2013
रग-रग वफ़ा से चूर दिल विसाल-ए-यार कर दिया
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रग-रग वफ़ा से चूर दिल विसाल-ए-यार कर दिया,
नफरत से भर-भर उसने फिर मेरे हवाले कर दिया |
__________________हर्ष महाजन
उसने अपनी कलम से मेरे ही अहसास ढाले हैं
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उसने अपनी कलम से मेरे ही अहसास ढाले हैं,
उसे अहसास भी नहीं उसने मेरे ही शेर पाले हैं |
कैसे कहूँ कुरेद डाले हैं उसने मेरे पुराने वो ज़ख्म,
जो भी फिकरा मैं पढता हूँ उसमें मेरे ही छाले हैं |
____________________हर्ष महाजन
तबाही का मंज़र उसने मोहब्बत में इस तरह देखा है
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तबाही का मंज़र उसने मोहब्बत में इस तरह देखा है,
कि ज़िंदगी और मौत में अब इक मामूली सी रेखा है |
रूठ-रूठ कर ज़िंदगी को बहुत जी लिया है उसने 'हर्ष',
पर कुदरत की किताब में उसका बस इतना ही लेखा है |
_____________________हर्ष महाजन |
Sunday, June 30, 2013
उसने मुझे अचानक दिल से यूँ उतार दिया
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उसने मुझे अचानक दिल से यूँ उतार दिया,
पल में ज्यूँ अजनबियों में यूँ शुमार किया |
बिन बात के कोई यूँ ही रूठता नहीं है 'हर्ष',
मैं आईना था उसका,उसने भी नकार दिया |
__________________हर्ष महाजन
उसने मुझे अचानक दिल से यूँ उतार दिया,
पल में ज्यूँ अजनबियों में यूँ शुमार किया |
बिन बात के कोई यूँ ही रूठता नहीं है 'हर्ष',
मैं आईना था उसका,उसने भी नकार दिया |
__________________हर्ष महाजन
Wednesday, June 26, 2013
आज उन्होंने अपना ऐतराज़ बुड्डों पर थोप दिया
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आज उन्होंने अपना ऐतराज़ बुड्डों पर थोप दिया,
कीमती जज़्ब-ओ-अंदाज़ उन चुनिंदों पर रोप दिया |
कैसे कहूँ लांग गए वो अपनी ही खींची लकीरों को,
बेवज़ह दर्दीला अहसास उन बाशिंदों को सौंप दिया |
_____________________हर्ष महाजन
Tuesday, June 25, 2013
मैं हूँ अलफ़ाज़ जुबां पर मैं तभी रुकता हूँ
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मैं हूँ अलफ़ाज़ जुबां पर मैं तभी रुकता हूँ,
दर्द महसूस अगर हो तो मैं फिर बिकता हूँ |
यूँ ही क्यूँ पूछे कोई मेरी ग़ज़ल को यारों ,
मैं भी हालात की हर बात मगर लिखता हूँ |
__________________हर्ष महाजन
Monday, June 24, 2013
गुस्ताख़ ज़िन्दगी में इक भूल शुमार हो गयी
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गुस्ताख़ ज़िन्दगी में इक भूल शुमार हो गयी |
बरसों छुपी इक दास्तां पल में अखबार हो गयी |
दवा वफ़ा की क्या करूँ वो ज़ुल्मों से महफूज़ हो,
परेशां हूँ मैं इस तरह ये नज़र दीवार हो गयी |
_______________________हर्ष महाजन
Thursday, June 20, 2013
महके तेरा नीरा ये जन्म रात-दिन |
जन्म०दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएँ और बधाई! नीरा राजपाल जी
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तुम महसूस करो खुशियाँ रात-दिन,
महके तेरा नीरा ये जन्म रात-दिन |
बीती उम्र में देखे ज़ख्म तूने जो,
मरहम खुद ही खुदा देगा कहेगा ये लो ,
जो भी शख्स तेरी ज़िन्द में था राक्षस बना,
उनसे इक-इक ज़ख्म का हिसाब लेगा वो |
तेरे दामन में हर दाग खुद धोएगा,
वो खुदा जब फलक से उतरेगा एक दिन |
तुम महसूस करो खुशियाँ रात-दिन,
महके तेरा नीरा ये जन्म रात-दिन |
नीरा जी आपकी लेखनी सदा हमें भाती रहे ,
ज़िंदगी अनमोल आपकी सदा मुस्कराती रहे |
जन्म दिन मुबारक जन्म दिन मुबारक !!!
_____________हर्ष महाजन
Friday, June 14, 2013
मुझपे इल्जामे मोहब्बत की खबर रखते हैं
...
मुझपे इल्जामे मोहब्बत की खबर रखते हैं,
मेरी वो आँखों के ख्वाबों पे नजर रखते हैं |
मिले है चैन उन जुल्फों में ज्यूँ शजर है घना,
आते चुपचाप इधर नजर वो मगर रखते हैं |
_____________________हर्ष महाजन |
Thursday, June 13, 2013
हमने उन्हें हद्द तक चाहा भी मगर टूट गए
...
हमने उन्हें हद्द तक चाहा भी मगर टूट गए,
इश्क शुरू हुआ भी न था वो हमसे रूठ गए |
____________________हर्ष महाजन
Sunday, June 9, 2013
रात भर अश्क मोती बन निकले
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रात भर अश्क मोती बन निकले,
ज्यूँ ही ख़्वाबों में तेरे हम निकले |
अश्क भर-भर नहला दिया तुमने,
तेरे दिल से जो बन के गम निकले |
__________हर्ष महाजन
रात भर अश्क मोती बन निकले,
ज्यूँ ही ख़्वाबों में तेरे हम निकले |
अश्क भर-भर नहला दिया तुमने,
तेरे दिल से जो बन के गम निकले |
__________हर्ष महाजन
Saturday, June 8, 2013
ज़िंदगी नासूर बनी हो मुझको ऐसा गम नहीं
.....
ज़िंदगी नासूर बनी हो मुझको ऐसा गम नहीं,
ज़िंदगी तेरी न हो अब मुझमें ऐसा दम नहीं |
तेरी खातिर छोड़ दिये अब दर्द के वो फासले,
भूल गए अब ज़ख्मीं पल भूले मगर वो ज़ख्म नहीं |
आजकल शेरों में मेरे बेरुखी और रुसवाई,
जिस तरह ग़ज़लें उठीं तेरी, जहां थे हम नहीं |
हम चले महफ़िल से तेरी भूल कर सब अदावतें,
बह चुके अब अश्क इतने होती आखें नम नहीं |
रंग बिरंगी दुनिया में अब खुशियाँ सब बेरंग हुई,
इल्तजा ऐ खुदा उठा ले, कोई यहाँ हमदम नहीं |
____________________हर्ष महाजन
अदावतें=वैर
ज़िंदगी नासूर बनी हो मुझको ऐसा गम नहीं,
ज़िंदगी तेरी न हो अब मुझमें ऐसा दम नहीं |
तेरी खातिर छोड़ दिये अब दर्द के वो फासले,
भूल गए अब ज़ख्मीं पल भूले मगर वो ज़ख्म नहीं |
आजकल शेरों में मेरे बेरुखी और रुसवाई,
जिस तरह ग़ज़लें उठीं तेरी, जहां थे हम नहीं |
हम चले महफ़िल से तेरी भूल कर सब अदावतें,
बह चुके अब अश्क इतने होती आखें नम नहीं |
रंग बिरंगी दुनिया में अब खुशियाँ सब बेरंग हुई,
इल्तजा ऐ खुदा उठा ले, कोई यहाँ हमदम नहीं |
____________________हर्ष महाजन
अदावतें=वैर
Wednesday, June 5, 2013
दुश्मनी भी शख्स खूब किया करते हैं
...
दुश्मनी भी शख्स खूब किया करते हैं
पछताते हैं फिर धूप लिया करते हैं |
फल से भरे शज़र झुक जाते है बहुत,
पत्थर खा के भी फल दिया करते हैं |
______________हर्ष महाजन
दुश्मनी भी शख्स खूब किया करते हैं
पछताते हैं फिर धूप लिया करते हैं |
फल से भरे शज़र झुक जाते है बहुत,
पत्थर खा के भी फल दिया करते हैं |
______________हर्ष महाजन
उम्र-भर जुल्फों तले जिनकी बंद कर आँखें सकूं पाता रहा
...
उम्र-भर जुल्फों तले जिनकी बंद कर आँखें सकूं पाता रहा,
उन्हें देखते ही जुल्फें शानों से अब वो हटा लिया करते हैं |
जिनको देखने भर से उनके चहरे पर आ जाती थी रौनक,
आजकल उनके शेरों को देख वो आंसू बहा लिया करते हैं |
___________________हर्ष महाजन |
Monday, June 3, 2013
प्यार पे पाबंदी उसका अपना अधिकार था,
...
प्यार पे पाबंदी उसका अपना अधिकार था,
मगर मैं सोचता हूँ उसका ज़हन बीमार था |
इंतज़ार था उसे शख्स वो लौटेगा तो ज़रूर,
भ्रम था उसका वो जहाँ था उसी का प्यार था |
______________हर्ष महाजन
कैसे कहूं 'हर्ष' मेरी ग़ज़लों का हासिल तुम ही तो हो
...
कैसे कहूं 'हर्ष' मेरी ग़ज़लों का हासिल तुम ही तो हो
ख़त जो भेजा था तुझे मैंने, उसे ज़रा मोड़ के देख |
________________हर्ष महाजन
कैसे कहूं 'हर्ष' मेरी ग़ज़लों का हासिल तुम ही तो हो
ख़त जो भेजा था तुझे मैंने, उसे ज़रा मोड़ के देख |
________________हर्ष महाजन
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