MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Tuesday, September 6, 2011

रो दिया करती है

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देख कर मेरे खतों को अक्सर वो रो दिया करती है शायद मेरी यादों को मुसलसल वो खो दिया करती है |
Monday, September 5, 2011

हुस्न-ओ-शबाब

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हुस्न-ओ-शबाब बिना जिंदगी जहन्नुम है मुसलसल शराबी के लिए यही बाकी रहा हर्ष महाजन

सब बदल जाएगा

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आज नहीं तो कल सब बदल जाएगा घर को लगी आग तो सब जल जाएगा। गिर के संभलना इंसा की फितरत है मगर       नज़रों से गिरा कभी न संभल पाये...

एक लाश

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_____रूह चली आज अपने घर को छोड़ चली इक सुरीले स्वर को _____दूंद्ती है .... वो मजबूत कांधा बड़ी महरबानी उनकी जिन्होंने जिस्म को मजबूती से बा...
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____ग़ज़ल

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दोस्तों से अनचाहे प्रश्न  करने लगा है ये मंच मुझे अजनबी  लगने लगा है | जुबां जो कभी चुप न थी अब खामोश है ये सिलसिला दिल पत्थर करने लगा है ...
Sunday, September 4, 2011

वो ज़ख्म दिए चले

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प्यार मैं उनसे इस कदर करता चला जाऊं वो ज़ख्म दिए चले जाएँ मैं भरता चला जाऊं उनकी ये जिद्द के वो मुझे मार ही डालें मेरी ये जिद्द के उनपे ...

बे-अदब

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टूट के बिखर जाना कोई सबब नहीं तू मेरा दोस्त है कोई बे-अदब नहीं |

चाहता तो बहुत हूँ

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तू बहुत उदास है तुझे अब मनाऊँ कैसे चाहता तो बहुत हूँ पर दोस्त  तुझे हाथों की लकीरों में सजाऊँ कैसे !!!!!!!! हर्ष महाजन

_______ग़ज़ल

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मैं भयानक कवितायें पढ़ने लगा हूँ पर अपने साये से भी डरने लगा हूँ | है कोई खुदा यहाँ जो मुझे उठा सके मैं अमर हूँ अहसास करने लगा हूँ | ...
Saturday, September 3, 2011

क्यूँ मिली तुम

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क्यूँ मिली तुम मुझे इस तरह राहों में न खतम होने वाले सिलसिले हैं हम |
Friday, September 2, 2011

कारवाँ दर कारवां है जिंदगी

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गज़ल ख्वाब गर आंखों में हैं तो फिर जवां है जिंदगी खिल सके न गुल तो पूछो तू कहाँ है जिंदगी राम जाने क्यूँ किसी ने किस बिना पे कह दिया हाद्सा...
Thursday, September 1, 2011

Janam din

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___ ______Janam-Din-Mubarak___________ Tere janam-din pe tujhe aaj maiN kya pesh karooN Dil ke jazbaat hi sochta hooN tujhe pesh karoo...
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Sunday, August 28, 2011

इक अंदाज़

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प्यार करने वालों का अपना इक अंदाज़ होता है  जिधर भी होता है इक बे-वफ़ा साथ होता है | जज्बातों  से खेलना उनकी आदत ही सही मगर प्यार करने वालों ...
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Friday, August 26, 2011

_____________दो दो लोकतंत्र

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उठो साथियो आज हमें इक नया इतिहास बनाना है अन्ना के इस लोकपाल को संविधान में लाना है | लुट रहा है देश हमारा पहरेदार इसे लूट रहे इक-इक कर...
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Wednesday, August 24, 2011

Aise saksh khel rahe desh meiN

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Aise saksh khel rahe desh meiN Manmaani thhel rahe desh meiN Bhagat sukhdev ya ho sawarkar Insult unki sab jhel rahe desh meiN>> ...
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ये संविधान हमारा है क्यूँ संसद ने नकारा है

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संसद की बुनियाद आज इस तरह हिलने लगीं जिस तरह गिरगिट यहाँ अपना रंग बदलने लगीं | दिख रहा है वो धुंआ अब तक कहीं उठा नहीं नहीं दिखेगी आग वो जि...

भ्रष्टाचार

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भ्रष्टाचार को खींच कर धरती पे टिका दो साथियो भ्रष्टाचारी जो मिले मिटटी में मिला दो साथियो | पग-पग भर दो मैदानों में जहां कोई कण खाली हो...
Monday, August 22, 2011

सिंहासन अब हिल उठे हैं अन्ना तेरी बारी है

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सिंहासन अब हिल उठे हैं अन्ना तेरी बारी है भ्रष्टाचारी सिस्टम पर बस लोकपाल अब तारी है | भूल गए आज़ादी जो कीमत नहीं पहचानी थी भारत के जन-जन ...
Sunday, August 21, 2011

संभल न पाए राज तो ये राज बदल डालो

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संभल न पाए राज तो ये राज बदल डालो  ये संसद हुई बे-आवाज तो सर-ताज बदल डालो | न-दे जो पुख्ता लोकपाल उस सरकार का क्या करना अन्ना की बन आ...

युग-युग से पीड़ित देश को यारो "हर्ष " का ये नारा है

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युग-युग से पीड़ित देश को यारो "हर्ष " का ये नारा है "चलो दिल्ली चलो दिल्ली" हमें अन्ना ने पुकारा है | हिंदू मुस्लिम स...
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