MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Sunday, September 25, 2011

माँ

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दर्दो के सैलाब पलभर में चुन लेती है माँ आह निकलने से पहले सुन लेती है माँ सैलाब छुपा लेती है अपनी पलकों में वो हम चाहे न चाहें खुद सपने ब...
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Saturday, September 24, 2011

दुशमनी में पली दोस्ती

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हर बात यूँ ही खतम नहीं हो जाती ऐ 'हर्ष' दुश्मनी में पली दोस्ती भी यूँ ही स्वाह होती है | ________हर्ष महाजन

dil ki sair

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kahiN na kahiN hamaare lafz unke dil ki sair karte haiN jaane anjaane har lamha unse yuN  hi bair karte haiN Qeemte toh yahaN yuN hi gir rah...
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हलफनामाँ

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मुझ संग दुशमनी का जूनून उसे वफ़ा होने से पहेले था मेरे हसीं ख़्वाबों का पैकर वो खफा होने से पहले था भूल गया है वो सब कुछ वफाओं के तौर तरीके...

घायल

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ज़ुल्फ़ तेरी मांग तेरी उस पर नागिन सी लटें घायल खुद हुआ हूँ मैं, तेरी खता कुछ भी नहीं | ________हर्ष महाजन

गजल

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__________गज़लिका अनजान सी जब गुजरी थोड़ी सी तब गुजरी हद से तो तब गुजरी वो जिंद से जब गुजरी | आँखों में काजल था और बालों में  संदल था बे-मौत ...

हर याद मीठी

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हर याद मीठी बन जाये तो हर रात गुजर जाती है प्यार में नहीं इकरार तो जिंद बे-बात गुजर जाती है | ___________हर्ष महाजन
Friday, September 23, 2011

khalish

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Tere dil ki har khalish ko sanjoya maine afsos to hua mujhe ye kya kiya maine ___________Harash Mahajan

Aitbaar

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us aitbaar ka kya karooN jspe woh khara na utar saka Sajaaye to bahoot sochi haiN usey pakadna baaki hai _________harash mahajan

तिलिस्म

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उनके इस तिलिस्म का अब क्या करें चाँद से मुखड़े पर हमेशां हिज़ाब करते हैं | _________हर्ष महाजन

खुशिओं की दूकान

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गर हर शख्स के लिए खुशिओं की दूकान होती यकीनन ये खुशीआं कुछ दिन की मेहमान होती कीमत तो घट ही जाती हर चीज़ की दुनिया में मगर हर रूह की झोली ...

जो बोया है

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जो बोया है अब वही तो काटने आयें हैं हम खुदा ने यही कहा ले वही, तिलमिला नहीं | _______हर्ष महाजन
Thursday, September 22, 2011

सांप

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अपने बन कर जो उम्र भर गम दिया करते हैं उन्हें "आस्तीन के सांप" का मुहावरा दिया  करते हैं सांप  | ____________हर्ष महाजन्

उसने अपनी असलियत को पहचान लिया है

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दोस्तों एक कच्ची ग़ज़ल आपके बीच जो अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं है......सीधे कलम से आप तक बिना कागज़ पर आये आपके समक्ष पेश है.....ये ग़ज़ल एक सज्ज...
Tuesday, September 20, 2011

दिल का दर्द

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एक अपने बड़े ही सज्जन मित्र के लिए कही ये रचना ...मात्राओं की  रेखा को लान्गती हुई यहाँ पेश करने की हिमाकत कर रहा हूँ....और उम्मीद करता हूँ क...
Monday, September 19, 2011

कर्मों का हासिल

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मेरी तहरीरों को मिटाना इतना आसां नहीं ये मेरा यकीन है कोई दिल का गुमाँ नहीं | चुप जुबां से जो तुमने चाहा कदर की मैंने ये तेरे कर्मों का ...
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Saturday, September 17, 2011

फूल

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इस गुलिस्तान में खिलने को तो फूल बहुत हैं कोई फूल तुझ जैसा भी हो तो कोई बात बने | हर्ष महाजन
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Thursday, September 15, 2011

Beh'r par kuch prashn

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1.....बहर के बारे में कई ऐसे प्रश्न हैं जो जहन में कौंधते रहते हैं ...कुछ ऐसे ही प्रश्न यहाँ  पढ़ने वालों को मदद मिल सके ..दर्ज करना चाहूगा ....
Wednesday, September 14, 2011

बे-वफा

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तेरी किन-किन बातों का हिसाब किया जाए तू  तो अपना है  फिर क्या जवाब दिया जाए वफायें तेरी बिक रही हैं जवानी के शिकंजे में अब तू बता इन बे-व...

क्षणिका

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नेता जी  पत्नी और नौकरानी में  भेद नहीं रखते हैं वे हमेशां उदारवादी व्यवस्था का पक्ष धरते हैं | हर्ष महाजन
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