MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Wednesday, April 30, 2014

गम से रहा गाफिल जो शख्स खुश है खबर आने लगी

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.... गम से रहा गाफिल जो शख्स खुश है खबर आने लगी, है चोट चेहरे की सिलवटों में मगर नज़र आने लगी । कुछ दिन शहीदों की कब्र पर अब और ज...
Tuesday, April 22, 2014

क्या उदास नगमों का राज़ था टुकड़ों में दिल का साज़ था

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... क्या उदास नगमों का राज़ था, टुकड़ों में दिल का साज़ था, मैं हैरान हूँ इस बात पर मेरे दिल पे किस का राज़ था। मैं हूँ झौंका इश्...

KishtoN meiN rishtoN ko tum nibhate ho kyuN

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... KishtoN meiN rishtoN ko tum nibhate ho kyuN, Dil ko karke yuN ghayal sataate ho kyuN. Zindagi ne kyuN chaha wahi dil khuda,...
Monday, April 21, 2014

दर्द दिल में था उठा, साँस मुझसे रूठ गयी

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… दर्द दिल में था उठा, साँस मुझसे रूठ गयी, जिसे मुद्दत से था चाहा वो मुझसे छूट गयी । दिल में यादों की तरह आँख में आंसू की तरह, मैं तो जी ल...
Thursday, April 17, 2014

कितना मुश्किल था मेरे दिल की.....दरारों से यूँ चले आना 'हर्ष'

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..... कितना मुश्किल था मेरे दिल की ..... दरारों से यूँ चले आना  'हर्ष', मगर क्या कहूँ कितना हुनर रखते हो तुम दिल में उतर जाने का...

किस तरह बंद जाता है इन्सां प्यार में

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... किस तरह बंद जाता है इन्सां प्यार में, कुछ भी तो नहीं रहता फिर अख्तियार में । उम्र भर का साथ सोच तो लेता है मगर , सदियाँ बिता देता है ...

उस शख्स ने प्यार में कुछ ऐसे प्रश्न कर डाले

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.... उस शख्स  ने प्यार में कुछ ऐसे प्रश्न कर डाले, रातों की नींदें छीनी और छीने मुँह के निवाले ।  __ ० __  Us shaks ne pyaar m...

प्यार में शक की गुंजाईश कहाँ होती है

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... प्यार में शक की गुंजाईश कहाँ होती है,   गैरों में हक की नुमाईश कहाँ होती है । बन रहा दिल में अगर कोई आशियाँ उनका, फिर दरारों की ....
Monday, April 14, 2014

मैं तो अजनबी था फिर भी तुम हाथों में ढ़ूढते क्यूँ

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…  मैं तो अजनबी था फिर भी तुम हाथों में ढूँढ़ते क्यूँ , मैं तो खुद लकीर हाथों की बन तुझ में सज गया हूँ । ______________हर्ष महाजन  ......
Sunday, April 13, 2014

किस तरह मान लूँ कि वो शख्स रुक्सत हो जाए

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... किस तरह मान लूँ कि वो शख्स रुक्सत हो जाए, मेरी रगों में, खोलते खून की.…वज़ह वही तो है । ____________हर्ष महाजन ... Kis tarah maan looN ...
Saturday, April 12, 2014

बहुत कायल हूँ मैं उसका, मगर बुलाना नहीं चाहता

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.... बहुत कायल हूँ मैं उसका, मगर बुलाना नहीं चाहता, सच तो ये है दर्द की महफ़िल मैं सजाना नहीं चाहता । बहुत सोचता हूँ कहीं दफ़न कर दूँ  इन अह...

देखते ही देखते शेरांवाली का मंजर बना

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... देखते ही देखते शेरांवाली का मंजर बना, बारूद सा उठा जयकारा मेरे अंदर बना । जानी पहचानी थी रहमत पहाडाँवाली की, जिस्म मेरा न रहा ज्य...

मेरी तन्हाइयों में जब-जब इल्लत बन सताती है वो

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... मेरी तन्हाइयों में जब-जब इल्लत बन सताती है वो, मुजरिम हूँ उसका जब-तब अजनबी बन बताती है वो । कब तलक उसके दिल की सरहदों पर चलेगा प...

कितने अरसे बाद मेरे दिल की सरहदों पर अहसास उठे हैं

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... कितने अरसे बाद  मेरे दिल की सरहदों पर अहसास उठे हैं, बहुत उदास हूँ आजकल कुछ लम्हे अभी तक मुझसे रूठे हैं । ________________हर्ष मह...

दिल की सरहदों पर मुआमले हमेशां उलझा करते हैं

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... दिल की सरहदों पर मुआमले हमेशां उलझा करते हैं, ये तो मकसद हैं दिलों के दिलों में ही सुलझा करते हैं । ____________हर्ष महाजन .... ...

न जाने मेरी सरहदों को कब पार कर लिया उसने

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... न जाने मेरी सरहदों को कब पार कर लिया उसने, अनजाने में ही इक नयी दुनिया बसा ली है मैंने । -----------हर्ष महाजन ... Na jaane merii...

खुदा का फज़ल है जो उसने दिलों की सरहदें बना डाली

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... खुदा का फज़ल है जो उसने दिलों की सरहदें बना डाली, मगर उस  की मर्जी बिना कहाँ दखल इन्सां का होता है । ________________हर्ष महाजन ... ...

अपने दिल की सरहदों पर उसने इस तरह बाढ़ लगाई है

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.... अपने दिल की सरहदों पर उसने इस तरह बाढ़ लगाई है, मेरे अहसासों पर न जाने कितनी असरदार चोटें आयी है । __________हर्ष महाजन ... Apn...

शायरी का कलमकार से सिर्फ इतना सा वास्ता होता है

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.... शायरी का कलमकार से सिर्फ इतना सा वास्ता होता है,   कागज़ पर जब भी लिखता है फकत इक हादसा होता है । ------------हर्ष महाजन

मोहब्बत में अंदर ही अंदर अब पिसने लगी है वो

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.... मोहब्बत में अंदर ही अंदर अब पिसने लगी है वो, जालिम है मेरे दिल के दरीचों से रिसने लगी है वो । -------------हर्ष महाजन
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