MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Tuesday, June 24, 2014

मेरे गुलिस्तान में खिलने को तो फूल बहुत

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पुरानी डायरी से ...... मेरे गुलिस्तान में खिलने को तो फूल बहुत हैं, कोई फूल तुझ सा भी हो.....तो कोई बात बने | _________हर्ष महाजन

खुद पे ज़बर यूँ करके मुहब्बत का दम मैं भरता हूँ

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... खुद पे ज़बर यूँ करके मुहब्बत का दम मैं भरता हूँ, कैसी बेबसी मेरी.........बे-वफ़ा में रंग मैं भरता हूँ | लाइलाज दर्द-ए-इश्क है....ल...
Sunday, June 22, 2014

चलो ईमान अपना....आजमा कर देखते हैं

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... चलो ईमान अपना....आजमा कर देखते हैं, हम अकेले हैं....बत्तियाँ बुझा कर देखते हैं | लोग तो कहते हैं तुम चौहदवीं  का चाँद हो, चलो रात...
Saturday, June 21, 2014

सैकड़ों अयियाश ज़मीं पर चलने लगे हैं

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... सैकड़ों अयियाश....ज़मीं पर चलने लगे हैं, कुछ दोस्त भी हैं...उनमें जो खलने लगे हैं | खौफज़दा हो गया है हर तसव्वुर अब यहाँ, बेबसी इत...

फूँक-फूँक कर कदम रखना मेरी आदत में शुमार था

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... फूँक-फूँक कर कदम रखना मेरी आदत में शुमार था, मैं बस फूंकता ही रहा वो कम्बखत आगे निकल गया | ________________हर्ष महाजन
Friday, June 20, 2014

गर ये गजलें मेरी हो गयीं बहर में, दोस्त बनकर खुदा मुस्कराएगा फिर

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... गर ये गजलें मेरी हो गयीं बहर में, दोस्त बनकर खुदा मुस्कराएगा फिर, गर वो है बादशाह मेरी तकदीर का, पत्थरों से निकल के वो आएगा फिर | ...
Wednesday, June 18, 2014

दरमियाँ आँखों के जब दुनियाँ जवाँ होती है

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... दरमियाँ आँखों के जब......दुनियाँ जवाँ होती है, पर ये उल्फत है जो.......लफ़्ज़ों में बयाँ होती हैं | ये जुबां आँखों की,नफरत की जग...
Tuesday, June 17, 2014

जिसे चाहा पर वो मिला नहीं,मुझे वक़्त से भी गिला नहीं

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... जिसे चाहा पर वो मिला नहीं,मुझे वक़्त से भी गिला नहीं | ये कैसा हुस्न-ओ-मिजाज़ था,जो अश्कों तक से हिला नहीं | न था ज़र्ब उसको मैं पा स...
Monday, June 16, 2014

यूँ दिल-ओ-जहाँ से गुज़र गया

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.... यूँ दिल-ओ-जहाँ से.....गुज़र गया, वो ख्यालों से ही..........उतर गया | था जिस्म-ओ-जाँ की तलब में जो , अब बातों से भी........ज़िकर ...
Saturday, June 14, 2014

मिले जो तुम तो ये पर्दा ज़हन से सरका है

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... मिले जो तुम तो ये पर्दा...ज़हन से सरका है, लगा ज्यूँ सदियों बाद ये दिल मेरा धड़का है | संभालो बाँध शहर के....लहर से टूट न जाएँ, क...
Friday, June 13, 2014

लोग तो खुशियाँ और.... इमदाद बाँटते हैं

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... लोग तो खुशियाँ और.... इमदाद बाँटते हैं, हम तो कवि हैं....गम में भी दाद बाँटते हैं | ज़रूरी नहीं कि......मौत पर रोया ही जाए, हम ग़ज़...
Thursday, June 12, 2014

गर उन्हें याद नहीं ख़त में क्यूँ ‘हम’ लिखते हैं

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... गर उन्हें इल्म नहीं, ख़त में क्यूँ, ‘हम’ लिखते हैं, वो यूँ   कहते हैं कि....मज़मून-ए-गम लिखते हैं | उनसे दूरी का उन्हें.........
Wednesday, June 11, 2014

छोटी सी ये रियासत.....दोस्तों की महफ़िल

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.... छोटी सी ये रियासत.....दोस्तों की महफ़िल, दोस्तों की अमानत......दोस्तों की महफ़िल | देखकर रखना कदम सल्तनत आम नहीं ये , दोस्त ही ह...
Monday, June 9, 2014

खुदाया तेरे जहाँ में ये हल नहीं मिलता

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... खुदाया तेरे जहाँ में.............ये हल नहीं मिलता, जो पल गुज़र गया ज़िन्द से वो पल नहीं मिलता | जो बेटे अश्क बहा कर के..........माँ ...

दिल से निकलें जो भी अहसास....मेरी ग़ज़लों में हैं

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... दिल से निकलें जो भी अहसास....मेरी ग़ज़लों में हैं, मेरी ख्वाहिशें मेरे जज़्बात..........मेरी ग़ज़लों में हैं | जो भी खुशियाँ और गम भी ...
Sunday, June 8, 2014

तेरी जुल्फों की अदाओं ने, मुझे गूंध लिया

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... . तेरी जुल्फों की अदाओं ने, मुझे गूंध लिया, तूने लहरा के इन्हें फिर से जहां लूट लिया | जब तू इतरा के इन्हें...करती चेहरे से जु...

वो शाम और वो जुल्फें मुझे खूब याद आयें

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... वो शाम और वो जुल्फें, मुझे खूब याद आयें, नींदों में है खलिश सी कह दो की बाज़ आयें | मेरे लफ्ज़ मेरी ग़ज़लें...अब हुस्न से हैं तारी, ...

थी उसकी रंजिशें तो हमने यार छोड़ दिया

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... थी उसकी रंजिशें तो.....हमने यार छोड़ दिया, गरज भी उसकी मगर हमने प्यार छोड़ दिया | गज़ब की थीं नसीहतें.....जो तनहा कर गयीं, जिसे था ...
Friday, June 6, 2014

ये नसीबों का है सिलसिला...किसी कब्र पर बने ताजमहल

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... ये नसीबों का है सिलसिला...किसी कब्र पर बने ताजमहल, कई बदनसीब इस जहाँ में हैं न दफ़न मिले न मिले कफन | ______________हर्ष महाजन ...
Wednesday, June 4, 2014

बिखरे रिश्तों की दरारें अब मिटाऊं कैसे

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.... बिखरे रिश्तों की दरारें अब मिटाऊं कैसे, मोम के रिश्ते.....गर्मियों से बचाऊँ कैसे | इतना घुला है ज़हर उसके जहन में 'हर्ष', ...
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