MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Sunday, November 23, 2014

पी गए दरिया समंदर लहर मगर इक बाकी है

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... पी गए दरिया समंदर.........लहर मगर इक बाकी है, काबिल-ए-शायरी का महफ़िल में सफ़र इक बाकी है | ... Pee gaye dariya samander laher ma...

मुझको आता ही नहीं लफ्ज़-ए-शायरी का हुनर

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... मुझको आता ही नहीं लफ्ज़-ए-शायरी का हुनर, मैंने जो छेडी ग़ज़ल आज फ़क़त उसकी खातिर | ... Mujhko aata hi nahiN lafz-e-shayrii ka...

साफ़ करते ही रहो अपना सभी गर्द-ओ-गुबार

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… साफ़ करते ही रहो अपना सभी गर्द-ओ-गुबार, पाक खुद होगी मोहब्बत तेरी अपनी खातिर | ... Saaf karte hii raho apna sabhi gard-o-gubaar,...

अहतियातन तो मैं थोड़ी सी पीता हूँ मगर

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... अहतियातन तो मैं थोड़ी सी पीता हूँ मगर, बाँट के पी न सकूं जाम का दरिया लेकिन | ... Ahtiyaatan toh maiN thodi sii peeta hu...

वो जो लड़की थी बनी आज फिर सबकी दुल्हन

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... वो जो लड़की थी बनी आज फिर सबकी दुल्हन, मुफलिसी लूट ली दुनियां ने.....हवस की खातिर | ... Wo jo ladkii thi bani……aaj phir s...
Saturday, November 22, 2014

मुझको अफ़सोस है रोता था तू मेरी खातिर

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… मुझको अफ़सोस है......रोता था तू मेरी खातिर, मैंने लो छोड़ा जहाँ….....आज बस तेरी खातिर | दिल की आवाज़ सुन....फिर रूह तड़प जाती है, मु...

करिश्मा-ए-कुदरत का है ये असर

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... करिश्मा-ए-कुदरत का है ये असर, था फतवा खुदा का हुआ बे-असर | बिछुड़े मिले हम थे बरसों अकेले, हुई बेवफा की बददुआ बे-असर | ... kar...
Friday, November 21, 2014

तेरी अब दुआओं में..इतना असर

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.. तेरी अब दुआओं में..इतना असर , गर तू है दिल में...खुदा बे-असर | दिल अब ख्यालों से.बहलता नहीं, तसव्वुर में सिजदा हुआ बे-असर | ....

हुई कागजों में खबर उनकी जुल्फें

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... हुई कागजों में खबर उनकी जुल्फें, करें ज़िंदगी पे असर उनकी जुल्फें | खुदा की कसम ये कलम छोड़ दूंगा, हुई बेवफा अब अगर उनकी जुल्फें...
Thursday, November 20, 2014

आँखों से टपकता हर कतरा आंसू होगा तुम क्या जानों

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Puraani Diary se kuch edit ke saath :- ... आँखों से टपकता हर कतरा आंसू होगा तुम क्या जानों, दे खुशियों में भी संग मिरा , आंसू होगा...
Wednesday, November 19, 2014

मुझ पर परवाज़ की तोहमत न लगाओ ‘हर्ष’,

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.... मुझ पर परवाज़ की तोहमत न लगाओ ‘ हर्ष’ , मेरी ज़िन्दगी का मरकज़ अब तू ही तो है | ______________ हर्ष महाजन ... Mujh par me...

गरूर नहीं है मुझको अपनी कलम का ऐ परवरदिगार

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.. गरूर नहीं है मुझको अपनी कलम का ऐ परवरदिगार, अपने शेरों की हिफाज़त रखना मेरा फ़र्ज़ भी तो है | _____________________हर्ष महाजन ...

तन्हाईयाँ यकीनन मुझ में घर करने लगी हैं

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... तन्हाईयाँ यकीनन मुझ में घर करने लगी हैं, दर्दें जो थीं पुरानी अब बे-सबब बढ़ने लगीं हैं | ___________हर्ष महाजन

रुसवा न होना तुम मेरे शेरों पर कभी

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... रुसवा न होना तुम......मेरे शेरों पर कभी, हमारी ज़िंदगी का हासिल बस यही तो है | __________हर्ष महाजन
Tuesday, November 18, 2014

कुछ तनहा हो रही है महफ़िल

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... कुछ तनहा हो रही है महफ़िल, नए मनके पिरो रही है महफ़िल | ख्वाब और उम्मीद हैं तो बहुत, मगर अभी सो रही है महफ़िल | किस तरह ज़लवा...
Monday, November 17, 2014

फलसफे मेरी कलम से अब बे-हिसाब चलने लगे

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... फलसफे मेरी कलम से अब बे-हिसाब चलने लगे, महफ़िलें रौशन हुई और फिर इंतखाब जलने लगे | __________________हर्ष महाजन ... Fals...

रुह के हसीन लिबास को....इस तरह बे-पर्दा न कीजिये

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... रुह के हसीन लिबास को....इस तरह बे-पर्दा न कीजिये, कुछ लोग गुस्ताख हैं जिन्हें इतना भी दर्जा न दीजिये | ________________हर्ष मह...
Saturday, November 15, 2014

अब देखो तुम ऐसा कहीं मंज़र न मिलेगा

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पुरानी डायरी से :- ... अब देखो तुम ऐसा कहीं मंज़र न मिलेगा, इन कातिलों के शहर में खंज़र न मिलेगा । आँखों से बहते अश्क भी अब सो...

उनकी मुहब्बत को अपने शेरों में पिरो दिया

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... उनकी मुहब्बत को...... अपने शेरों में पिरो दिया, बे-तकल्लुफी की मैंने....कहा उसने और रो दिया | यही बहुत था मेरे लिए....अपनी मंजि...
Friday, November 14, 2014

किस तरह रोकूँ मैं ये हिचकियाँ अब ‘हर्ष’

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... किस तरह रोकूँ मैं ये हिचकियाँ अब ‘हर्ष’ मुझसे इतना प्यार......सम्भलता नहीं है | मेरे आखिरी वक़्त का......ख्याल तो करो, तंग गलिय...
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