MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Friday, June 12, 2015

अपनी मंजिल के लिए...होश-ओ-खबर खो के चले

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... अपनी मंजिल के लिए...होश-ओ-खबर खो के चले, बा-वस्फे शौक़ दुश्मनी...........वो मगर बो के चले | मुब्तिला इश्क में वो.....एहसास-ए-अदब...
Thursday, June 11, 2015

बे-हिसाब हुए हैं बलवे दिल में उसके मेरी खातिर,

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 ... बे-हिसाब हुए हैं बलवे दिल में उसके मेरी खातिर, कितने ही अरमान हुए हैं आशकारा मेरी खातिर । सरे-राह जब उस शख्स ने पुकारा मुझे बेरहम...
Sunday, June 7, 2015

नश्तर-ए-ज़ुबाँ ने उसके अब इस कदर पर हैं कुतरे

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,,, नश्तर-ए-ज़ुबाँ ने उसके अब इस कदर पर हैं कुतरे, अब खुद परिशां है कि वो तन्हाई में कहाँ तक उतरे । ------------------हर्ष महाजन
Saturday, June 6, 2015

ऐ मौला इक ज़िंदा दिल उसके नाम कर देना

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... ऐ मौला इक ज़िंदा दिल उसके नाम कर देना, वो शख्स गम-ए-फ़िराक का मारा है आजकल | _________________हर्ष महाजन

नगमा-ए-इश्क पर, सवाल उठने लगे हैं 'हर्ष

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... नगमा-ए-इश्क पर, सवाल उठने लगे हैं 'हर्ष', किस कदर रश्क करने लगा है ज़माना तुम से | ________________हर्ष महाजन
Friday, June 5, 2015

अक्सर आ जाता है गम-ए-गुफ्तगू में वो भी आलम ‘हर्ष’

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... अक्सर आ जाता है गम-ए-गुफ्तगू में वो भी आलम ‘हर्ष’, दायरा-ए-हुकूक दायरा-ए-होश से आगे निकल जाते है | बदल जाती है कहीं रस्म-ए-वफ़ा.......

मुझे तेरी जवानी ढलने का अंदाजा कतई न था

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... मुझे तेरी जवानी ढलने का......अंदाजा कतई न था, वरना उलझता नहीं कभी तेरी जन्नत-ए-निगाह में | ___________________हर्ष महाजन

कब तलक दस्तक देते रहोगे म्यान में रहकर ‘हर्ष’

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... कब तलक दस्तक देते रहोगे ..... म्यान में रहकर ‘हर्ष’, दुश्मन-ए-जाँ है गर ज़िन्दगी की भीख मुझे गंवारा नहीं | _______________हर...

न मिली सुराग-ए-मंजिल और न ही कोई ख़त उसका

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... न मिली सुराग-ए-मंजिल......और न ही कोई ख़त उसका, बड़ा पसोपेश में हूँ कीमत अदा करने का वक़्त अब आया | _______________हर्ष महाजन ...

आलम तमाम ज़िंदा यहाँ कह-कह अल्फाज़-ए-गैर

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... आलम तमाम ज़िंदा यहाँ कह-कह अल्फाज़-ए-गैर, जज़्बात-ए-गम कहते रहे हम शाम से हुई सहर | आँखों में अश्क कम नहीं हाँ दिल भी अगर उदास, न...

कितने बे-जुबान अरमां थे दिल के दरमियाँ मेरे

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... कितने बे-जुबान अरमां थे दिल के दरमियाँ मेरे , जाने किसने राह्जनी की है दिल-ओ-दीवार में | ___________________हर्ष महाजन
Thursday, June 4, 2015

बे-वफ़ा से कभी सुलह न करना

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... बे-वफ़ा से कभी सुलह न करना, दर्द गर है उसका जुदा न करना | लूटा खूब होगा कशिश ने उसकी, मगर फिर से उसे खुदा न करना | __________ह...
Wednesday, June 3, 2015

मेरी जिंद का ये सफ़र इस तरह तमाम किया

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... मेरी जिंद का ये सफ़र इस तरह तमाम किया, लिख रुक्सत मुझे खुदा ने......अहतराम किया | उसकी महफ़िल में तल्ख़ आब तो बहुत है मगर, सकूंन-ए...

जाने उल्फत में कई लोग सज़ा देते हैं

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... जाने उल्फत में कई लोग सज़ा देते हैं, जाम-ए-इंसा पे बवालों का मजा लेते हैं | मर्ज़-ए-दिल उनका मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं, वो ...

चूमा किये था होंट नशा मुल्तवी न हो

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... चूमा किये था होंट नशा मुल्तवी न हो, मैं होश में रहूँ न रहूँ वो ज़ख़्मी न हो | छा रहा हूँ इस तरह मैं खुद शराब पर, दिल मेरा करीब त...

क्यूँ है काबिज़ वो ज़हन में कहीं बन के इक ख्याल

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... क्यूँ है काबिज़ वो ज़हन में कहीं बन के इक ख्याल, वो तो गुजरा हुआ कल था कहीं जुल्फों का खुमार | हम तो कायल थे लबों के पिए थे जाम-ओ...
Tuesday, June 2, 2015

चाँद छुप जाएगा घूंघट तो हटाकर देखो

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... चाँद छुप जाएगा घूंघट तो हटाकर देखो, शाम तन्हाई में आँखें तो मिलाकर देखो | . मेरी आवाज़ रुला देगी ज़माने भर को, गर वो जानेंगे मैं...
Saturday, May 30, 2015

लोग कहते हैं नशा गम को भुला देता यहाँ

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... मुझसे रुठोगे अगर तुम तो किधर जाऊंगा, मैं तो आईना तेरा टूटा तो बिखर जाऊँगा | कुछ तो होती है खलिश चेहरा बदलने वाले, दिल में चाहत त...
Wednesday, May 27, 2015

आइये आज समंदर को बदल डालें

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... आइये आज समंदर को बदल डालें , मेरे कुछ शेर हैं उनमें वज़न डालें | मगर बदलूं कैसे बदनसीब मुक़द्दर, चलो हाथ की लकीरों में खलल डालें...

जहाँ में बे-वफाई का वफ़ा पर.........जोर है बे-पनाह

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... जहाँ में बे-वफाई का वफ़ा पर........जोर है बे-पनाह , मगर रंज है मुझे इस बात का ये करम सभी ने किया | - ____________हर्ष महाजन
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