MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Wednesday, July 22, 2015

बरबादियों की...रुदाद ग़ज़ल

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... बरबादियों की...रुदाद ग़ज़ल, बदनामियों का जवाब ग़ज़ल | हो अजब सी दास्ताँ हुस्न गर, ज़ख्मों भरी है अज़ाब ग़ज़ल | ज़िंद से जहाँ हो....
Tuesday, July 21, 2015

कलयुग में खूब बिकेगा वो ईमान ही होगा

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... कलयुग में खूब बिकेगा वो ईमान ही होगा, इंसान का दुश्मन......यहाँ इंसान ही होगा | . दलदल बनेंगे रिश्ते....हर पोशाक पर पैबंद, दिल...
Monday, July 20, 2015

जो खुश्क हुए थे ज़ख्म, उनमें दर्द आज भी है

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... जो खुश्क हुए थे ज़ख्म, उनमें दर्द आज भी है, वो ज़िंदा हैं तो नहीं, दिल में भ्रम आज भी है |  मैं जानता हूँ मुझे, उसका कभी इं...
Thursday, July 16, 2015

मुझको इस शहर में…ऐसे भी नज़ारे थे मिले

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... मुझको इस शहर में…ऐसे भी नज़ारे थे मिले, दिन में कातिल कभी रातों को सहारे थे मिले | वो थे क्या दिन सभी इल्जाम तेरे सर थे लिए,...
Wednesday, July 15, 2015

मन के साए से तुझे खुद ही रिहा कर दूंगा

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... मन के साए से तुझे खुद ही रिहा कर दूंगा, मेरा वादा है तुझे दिल से जुदा कर दूंगा | कैसे कर दूं मैं क़त्ल दिल से तेरी चाहत का, ...
1 comment:
Sunday, July 12, 2015

इन हवाओं से कभी मेरा पता पूछोगे

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... इन हवाओं से कभी.....मेरा पता पूछोगे, किस तरह आता मुझे तेरा नशा पूछोगे | तूने जो ली थी कसम मुझसे जुदा होने पर, मेरी धड़कन क...
Friday, July 10, 2015

मेरा दिल मुझसे बदगुमां लेकिन

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... मेरा दिल मुझसे बदगुमां लेकिन, है ये कातिल पर रहनुमां लेकिन | . हर पल रंगीन महफ़िलों पे फ़िदा, हरसूं ज़ख्मों के हैं निशां लेकिन | ...
Wednesday, July 1, 2015

हाथ की ये लकीरें मेरी.....इधर-उधर जाती नहीं

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... हाथ की ये लकीरें मेरी.....इधर-उधर जाती नहीं, हैं तो अपनी ये मगर...समझ में क्यूँ आती नहीं | खुद ये खामोश मगर इनमें किस्मत का ज़िक...

ग़लत-फ़हमियां थीं बढीं फासले बढ़ते रहे

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... ग़लत-फ़हमियां थीं बढीं फासले बढ़ते रहे, हम महोब्बत में थे वो दुश्मनी करते रहे | दिल से मजबूर हैं हम तबादला कैसे करें, इंत...
Tuesday, June 30, 2015

तनहा रहकर अपनों की याद खूब आती है

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... तनहा रहकर अपनों की याद खूब आती है, अब मगर अपनों से मुलाकातें नहीं होती | ___________हर्ष महाजन
Saturday, June 27, 2015

बे-सबब आज उदासी क्यूँ है....बहुत दिल में

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... बे-सबब आज उदासी क्यूँ है....बहुत दिल में, इश्क न पहले था न आज मुहब्बत दिल में | जलता फिरता हूँ पढ़-पढ़ के तेरे ख़त यूँ ही, जाने क...
5 comments:
Friday, June 12, 2015

मुब्तिला इश्क में वो एहसास-ए-अदब भूल गए

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... अपनी मंजिल के लिए होश-ओ-खबर खो के चले, बा-वस्फे शौक़ दुश्मनी.........वो मगर बो के चले |  मुब्तिला इश्क में वो....एहसास-ए-अदब...

अपनी मंजिल के लिए...होश-ओ-खबर खो के चले

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... अपनी मंजिल के लिए...होश-ओ-खबर खो के चले, बा-वस्फे शौक़ दुश्मनी...........वो मगर बो के चले | मुब्तिला इश्क में वो.....एहसास-ए-अदब...
Thursday, June 11, 2015

बे-हिसाब हुए हैं बलवे दिल में उसके मेरी खातिर,

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 ... बे-हिसाब हुए हैं बलवे दिल में उसके मेरी खातिर, कितने ही अरमान हुए हैं आशकारा मेरी खातिर । सरे-राह जब उस शख्स ने पुकारा मुझे बेरहम...
Sunday, June 7, 2015

नश्तर-ए-ज़ुबाँ ने उसके अब इस कदर पर हैं कुतरे

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,,, नश्तर-ए-ज़ुबाँ ने उसके अब इस कदर पर हैं कुतरे, अब खुद परिशां है कि वो तन्हाई में कहाँ तक उतरे । ------------------हर्ष महाजन
Saturday, June 6, 2015

ऐ मौला इक ज़िंदा दिल उसके नाम कर देना

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... ऐ मौला इक ज़िंदा दिल उसके नाम कर देना, वो शख्स गम-ए-फ़िराक का मारा है आजकल | _________________हर्ष महाजन

नगमा-ए-इश्क पर, सवाल उठने लगे हैं 'हर्ष

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... नगमा-ए-इश्क पर, सवाल उठने लगे हैं 'हर्ष', किस कदर रश्क करने लगा है ज़माना तुम से | ________________हर्ष महाजन
Friday, June 5, 2015

अक्सर आ जाता है गम-ए-गुफ्तगू में वो भी आलम ‘हर्ष’

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... अक्सर आ जाता है गम-ए-गुफ्तगू में वो भी आलम ‘हर्ष’, दायरा-ए-हुकूक दायरा-ए-होश से आगे निकल जाते है | बदल जाती है कहीं रस्म-ए-वफ़ा.......

मुझे तेरी जवानी ढलने का अंदाजा कतई न था

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... मुझे तेरी जवानी ढलने का......अंदाजा कतई न था, वरना उलझता नहीं कभी तेरी जन्नत-ए-निगाह में | ___________________हर्ष महाजन

कब तलक दस्तक देते रहोगे म्यान में रहकर ‘हर्ष’

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... कब तलक दस्तक देते रहोगे ..... म्यान में रहकर ‘हर्ष’, दुश्मन-ए-जाँ है गर ज़िन्दगी की भीख मुझे गंवारा नहीं | _______________हर...
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