MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Monday, December 28, 2015

देखो ऐसा न हो ख्वाब इक यूँ पलता रहे

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... देखो ऐसा न हो....ख्वाब इक......यूँ पलता रहे, कहो कुछ इस तरह दिल में चिराग जलता रहे | हैरान हूँ मैं मुसलसल.............तेरी अदाओ...
Friday, December 25, 2015

अक्सर खामोश रहा करता है वो शख्स

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... अक्सर खामोश रहा करता है वो शख्स, जाने कितने तूफ़ान लिए घूम रहा है वो | हर्ष महाजन
Wednesday, December 16, 2015

वक़्त के थपेड़ों ने उसे इस कदर बुझाना चाहा

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... वक़्त के थपेड़ों ने उसे इस कदर बुझाना चाहा, हुस्न तबाह कर उसे तवायफों में बिठाना चाहा | न मिली सुराग-ए-मंजिल न ही उसे राहत कोई, कै...
Saturday, December 12, 2015

बिहार जनता को इतनी जल्दी थी गरीबी में जाने की

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... बिहार जनता को इतनी जल्दी थी गरीबी में जाने की, तो मोदी जी,क्या ज़रुरत थी तुम्हें सत्ता में आने की | बहुत हुआ संसद के गलियारों में ...
Sunday, November 22, 2015

खुदकशी करना इतना भी तो आसां नहीं है 'हर्ष'

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... खुदकशी करना इतना भी तो आसां नहीं है 'हर्ष', किस तरह संवरेगी ज़िन्दगी मेरे जाने के बाद | _________________हर्ष महाज...
Tuesday, November 17, 2015

इक ऐंज दा यार मिन्नू चाही दा ई ( पंजाबी गीत )

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पुराणी शायरी से....... ========= पंजाबी गीत इक ऐंज दा यार मिन्नू चाही दा ई, तेरे वांग दा यार मीनू चाही दा ई | दिलदार वि होवे मेरी तर...
Monday, November 2, 2015

मुझे यूँ ही तलब न किया करो अपनी तस्वीरों से

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... मुझे यूँ ही तलब न किया करो अपनी तस्वीरों से, न जाने किस लम्हा ये धड़कन मेरा साथ छोड़ दे | __________________हर्ष महाजन

कुछ ख्यालात तेरे, संग हैं तन्हाईयाँ मेरी

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... कुछ ख्यालात तेरे, संग हैं तन्हाईयाँ मेरी, इसे तेरा प्यार कहूँ या कहूँ मैं हुनर अपना | ____________हर्ष महाजन
Thursday, October 8, 2015

होगा अफ़सोस अगर रस्म ये अदा की जाए

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... होगा अफ़सोस अगर रस्म ये अदा की जाए, दोस्त ज़ख़्मी हो मगर उसको सज़ा दी जाए | हमसे पूछोगे ग़ज़ल क्या और क्या है असर, इक नदी दर...
Monday, October 5, 2015

इतनी करो न हमसे शरारत न यूं कभी

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... इतनी करो न हमसे शरारत न यूं कभी, आँखों से उठ न जाए शराफत न यूं कभी | . देखे, जो चांदनी में, नहाया तिरा बदन, हो जाए न शहर में ब...

पर निंदा हम सब करें जाग-जाग दिन रात

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============दोहे============ . पर निंदा हम सब करें जाग-जाग दिन रात करम बढावें आपणा बिन करनी बिन घात | . रख सलीब सर आपने, करो भजन दिन ...
Wednesday, September 23, 2015

न खेल दिल्लगी का तू कुछ तो खुदा से डर

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... न खेल दिल्लगी का तू कुछ तो खुदा से डर, इतना कहर है, आह में उसकी, सजा से डर | लेकर बहाना अम्न का पल-पल करे क्लेश, अपने जहाँ में आ...
Tuesday, September 22, 2015

ऐ ज़िंदगी सलाम तुझे....क्या किया सितम

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... ऐ ज़िंदगी सलाम तुझे....क्या किया सितम. इक पल में दे गयी तू मुझे अतीत और गम | लखते जिगर को छीन तुम्हें क्या सकूं मिला, कुछ ...

टूटी है दिल के आज मेरे दरम्यान ज़िंदगी

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... टूटी है दिल के आज मेरे दरम्यान ज़िंदगी, जब से हुई है तुझसे मेरी पहचान ज़िन्दगी | ___________हर्ष महाजन
Friday, August 28, 2015

बड़ी मुश्किल से पाला है वो दुश्मन राज़ की खातिर

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... बड़ी मुश्किल से पाला है वो दुश्मन राज़ की खातिर, तेरा भी नाम हो जाए..........मेरा इंतिकाम हो जाए | ______________हर्ष महाजन ...
Tuesday, August 25, 2015

ऎ खुदा हो सके तो इक बार उनसे मिलने की बारी रखना

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.... ऎ खुदा हो सके तो इक बार उनसे मिलने की बारी रखना, वरना अकेली हूँ अपनी अदालत में मेरी भी तैयारी रखना । -------------------–-...
Tuesday, August 11, 2015

गाफिल, तू मुझको ये बता किस-किस पे नज़र है

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... गाफिल, तू मुझको ये बता किस-किस पे नज़र है, चलना मगर, इस राह की, मुश्किल ये डगर है | इंसान की तहजीब पर दौलत का है दखल , पर भूलता ह...
Monday, August 10, 2015

जहाँ दर्द चले मद्धम-मद्दम ( गीत )

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गीत . जहाँ दर्द चले मद्धम-मद्दम, वहां दिल में उमंग भी लंबा रे, जहाँ हुस्न हुआ बेकल-बेकल, वहां प्यार का रंग भी मंदा रे | . जब रात ...
Wednesday, July 22, 2015

बरबादियों की...रुदाद ग़ज़ल

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... बरबादियों की...रुदाद ग़ज़ल, बदनामियों का जवाब ग़ज़ल | हो अजब सी दास्ताँ हुस्न गर, ज़ख्मों भरी है अज़ाब ग़ज़ल | ज़िंद से जहाँ हो....
Tuesday, July 21, 2015

कलयुग में खूब बिकेगा वो ईमान ही होगा

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... कलयुग में खूब बिकेगा वो ईमान ही होगा, इंसान का दुश्मन......यहाँ इंसान ही होगा | . दलदल बनेंगे रिश्ते....हर पोशाक पर पैबंद, दिल...
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