MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Saturday, February 27, 2016

ऐसा सैलाब अब...मेंरी आखों में क्यूँ

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... ऐसा सैलाब अब...मेंरी आखों में क्यूँ , ख्वाब मेरे मुसलसल सलाखों में ज्यूँ | था सुना इश्क पर......है खुदा मेहरबां, फिर उठा अंजुम...

इस कदर से थका हूँ ज़िंदगी से मैं अब

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... इस कदर से थका हूँ ज़िंदगी से मैं अब, कोई अच्छा लगे भी तो इज़हार न हो | कैसे मानू तू रग-रग में शामिल सदा, जब तलक दिल से कोई भी इक...

कुछ हैं रिश्ते मेरे संग नाकाम से

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... कुछ हैं रिश्ते मेरे संग नाकाम से , हैं मेरे वो मगर कुछ हैं बदनाम से | हूँ पशोपेश में छोडूं उनका सफ़र, हैं टिके जो मेरी खुशियों के...
Wednesday, January 27, 2016

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... कितने ही अफसानों से भरा है अपना ये  मुस्तकबिल 'ऐ 'हर्ष', चलो देखें कितने और सावन हैं अभी इन्हें.....अंजाम देने को । -...
2 comments:
Monday, January 11, 2016

कोई लगा नहीं पाएगा अंदाजा, तेरे हुस्न का सदियों तक

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... कोई लगा नहीं पाएगा अंदाजा, तेरे हुस्न का सदियों तक, किसी ने देखा जो नहीं तेरा जलवा कभी शाम होने के बाद ।  हर्ष महाजन

कितने ही एहसान किये हैं तुमने मुझपर ऐ तन्हाई

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... कितने ही एहसान किये हैं तुमने मुझपर ऐ तन्हाई, बेवफाई सहते...... ज़िन्दगी गुज़ार दी मैंने तेरे संग | _________हर्ष महाजन
Wednesday, January 6, 2016

कितना गजब करता हूँ

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... कितना गजब करता हूँ, उनसे इतना डरता हूँ | मुंहतोड़ जवाब देती वो, फिर भी उसपे मरता हूँ |  ___हर्ष महाजन

हिन्दूसितां की धरती पर अब सियासत क्यूँ मुरदार हुई

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... हिन्दूसितां की धरती पर.....सियासत क्यूँ मुरदार हुई, छोड़ मुहब्बत की ये कसमें, बुजदिली क्यूँ किरदार हुई | लहू जवानों का जब उबला.....

मेरी उलझनों को और भी उलझा देते हो

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... मेरी उलझनों को और भी उलझा देते हो, इतना सताया तुम्हें फिर भी दुआ देते हो | __हर्ष महाजन
Monday, January 4, 2016

मुझसे मेरी मेहरबानियों का कभी जिकर न करना

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... मुझसे मेरी मेहरबानियों का कभी जिकर न करना, तनहा हूँ, मेरी इस आदत का कभी फिकर न करना | ________________हर्ष महाजन
Monday, December 28, 2015

देखो ऐसा न हो ख्वाब इक यूँ पलता रहे

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... देखो ऐसा न हो....ख्वाब इक......यूँ पलता रहे, कहो कुछ इस तरह दिल में चिराग जलता रहे | हैरान हूँ मैं मुसलसल.............तेरी अदाओ...
Friday, December 25, 2015

अक्सर खामोश रहा करता है वो शख्स

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... अक्सर खामोश रहा करता है वो शख्स, जाने कितने तूफ़ान लिए घूम रहा है वो | हर्ष महाजन
Wednesday, December 16, 2015

वक़्त के थपेड़ों ने उसे इस कदर बुझाना चाहा

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... वक़्त के थपेड़ों ने उसे इस कदर बुझाना चाहा, हुस्न तबाह कर उसे तवायफों में बिठाना चाहा | न मिली सुराग-ए-मंजिल न ही उसे राहत कोई, कै...
Saturday, December 12, 2015

बिहार जनता को इतनी जल्दी थी गरीबी में जाने की

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... बिहार जनता को इतनी जल्दी थी गरीबी में जाने की, तो मोदी जी,क्या ज़रुरत थी तुम्हें सत्ता में आने की | बहुत हुआ संसद के गलियारों में ...
Sunday, November 22, 2015

खुदकशी करना इतना भी तो आसां नहीं है 'हर्ष'

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... खुदकशी करना इतना भी तो आसां नहीं है 'हर्ष', किस तरह संवरेगी ज़िन्दगी मेरे जाने के बाद | _________________हर्ष महाज...
Tuesday, November 17, 2015

इक ऐंज दा यार मिन्नू चाही दा ई ( पंजाबी गीत )

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पुराणी शायरी से....... ========= पंजाबी गीत इक ऐंज दा यार मिन्नू चाही दा ई, तेरे वांग दा यार मीनू चाही दा ई | दिलदार वि होवे मेरी तर...
Monday, November 2, 2015

मुझे यूँ ही तलब न किया करो अपनी तस्वीरों से

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... मुझे यूँ ही तलब न किया करो अपनी तस्वीरों से, न जाने किस लम्हा ये धड़कन मेरा साथ छोड़ दे | __________________हर्ष महाजन

कुछ ख्यालात तेरे, संग हैं तन्हाईयाँ मेरी

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... कुछ ख्यालात तेरे, संग हैं तन्हाईयाँ मेरी, इसे तेरा प्यार कहूँ या कहूँ मैं हुनर अपना | ____________हर्ष महाजन
Thursday, October 8, 2015

होगा अफ़सोस अगर रस्म ये अदा की जाए

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... होगा अफ़सोस अगर रस्म ये अदा की जाए, दोस्त ज़ख़्मी हो मगर उसको सज़ा दी जाए | हमसे पूछोगे ग़ज़ल क्या और क्या है असर, इक नदी दर...
Monday, October 5, 2015

इतनी करो न हमसे शरारत न यूं कभी

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... इतनी करो न हमसे शरारत न यूं कभी, आँखों से उठ न जाए शराफत न यूं कभी | . देखे, जो चांदनी में, नहाया तिरा बदन, हो जाए न शहर में ब...
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