MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Saturday, January 7, 2017

कितने फख्र से लिखा उसने....(क्षणिका)

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कितने फख्र से लिखा उसने.... 100 साल पुरानी पड़्पूंझे की दूकान । अपनी तरक्की दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर गया वो । *** हर्ष महाजन
Sunday, January 1, 2017

आँखों के समंदर में जो ख़्वाबों की है कश्ती

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... आँखों के समंदर में जो ख़्वाबों की है कश्ती ले जाए न भर-भर के वो अरमानों की बस्ती । अफ़साने जो दिल में हैं न अश्क़ों को ले जाएँ ये सोच...
Sunday, December 25, 2016

ग़लतफहमी इतनी कि वफाओं में भी गम निकले

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... ग़लतफहमी इतनी कि वफाओं में भी गम निकले, तूफ़ां उठा ऐसा कि पुराने खत भी सभी नम निकले । हर्ष महाजन

ये कैसा दौर चल निकला

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... रिश्तों में अब अहसासों का, ये कैसा दौर चल निकला, किसी ने....... संवारने में ज़िन्दगी लगा दी, कहीं पिटारी में... नफरतों का बम ...
Monday, December 19, 2016

कितनी दफा

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... कितनी दफा, __अर्ज़ी लगायी है उसके दरबार में, __लगता है ! असर नहीं आया, हमारी दुआओं में अभी । ___हर्ष महाजन

भूला नहीं हूँ (पापा की पाती )

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भूला नहीं हूँ ********* उद्विग्न हूँ, लाचार हूँ । क्या कहूँ, धरा पे खड़ा, मगर बेकार हूँ । सुबह का वक़्त , जाने कितनी रेलगाड़ियां पटर...
Monday, December 12, 2016

काले धन की क्या है कीमत.....रखते जो शौचालयों में

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... काले धन की क्या है कीमत.....रखते जो शौचालयों में, समझे थे धनवान मगर क्या सीख लिया विधालयों में | नज़र पड़ी जब मोदी की तो.......कीमत पड़ ग...

काला-धन

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काला-धन धूम मची है गलियारों में संसद ने क्या अब ठानी है, शोर मचा नोट-बंदी पे ज्यूँ अपनी बात मनवानी है | काले धन के हितकारी जब उठ-उठ...
Wednesday, August 31, 2016

लोग जाने शहर में किस तरह जी रहे हैं

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एक मुक्तक ... लोग जाने शहर में....किस तरह जी रहे हैं, इन हवाओं में शामिल ज़हर तक पी रहे हैं | गाँव जब से उठे हैं....शहर की चाल लेकर,...
Friday, August 19, 2016

भरे काँटों में खिलते फूलों को भी तोड़ना सीखा

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कलयुगी राखी भरे काँटों में खिलते फूलों को भी तोड़ना सीखा, है भैया का ये रिश्ता बहिनों ने तो जोड़ना सीखा | हिफाज़त ज़िन्दगी भर की लिया क...
Wednesday, August 10, 2016

यूँ किस्से अपने लिक्खे खूब उसने खुद सफीनों पर

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... यूँ किस्से अपने लिक्खे खूब उसने खुद सफीनों पर, मेरी इच्छा है वो गजलों में सब तब्दील हो जाएँ | हर्ष महाजन 1222-1222-1222-1222
Saturday, July 23, 2016

कब तलक निभाओगे ये दिखावटी रिश्ते,

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..... कब तलक निभाओगे ये दिखावटी रिश्ते, कब तलक बताओ तुम गफलत में रहोगे । ----------------हर्ष महाजन
Saturday, July 16, 2016

गर्द ओ गुबार इतना है मुझमें कि कह न सका

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.... गर्द ओ गुबार इतना है मुझमें कि कह न सका, किस्से और भी याद आये उनकेे जाने के बाद । -----------------हर्ष महाजन

रत्ती सा भी रब्त नहीं रहा उन दोनों में शायद

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... रत्ती सा भी रब्त नहीं रहा उन दोनों में शायद, उदास हो गया है मौसम उनके जाने के बाद । ----------------हर्ष महाजन
Monday, June 20, 2016

तेरे मसलों में न जाने किस जगह मंजिल मिले

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... तेरे मसलों में न जाने किस जगह मंजिल मिले, इतना भी अनमोल न रखना दिल में बस रंजिश मिले | कौन जाने किस सफ़र में कोई कब आकर मिले, ...
Sunday, June 12, 2016

तेरी हर अदा, हर जनून में मुझे बेहद असर लगता है

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... तेरी हर अदा, हर जनून में मुझे बेहद असर लगता है, मगर ऐ दोस्त मुझे बस तेरी रुकस्ती से डर लगता है । हर्ष महाजन

ऐ सनम तुझपे इतना नूर किधर से आता है

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... ऐ सनम तुझपे इतना नूर किधर से आता है, है फलक पर भी वो चन्दा उधर शरमाता है । तेरी साँसों की कसम मुझको हवाओं की कसम, तेरे हर...
Wednesday, May 25, 2016

सिर्फ इक ज़िक्र तेरा.........मेरे लम्हें रौशन

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... सिर्फ इक ज़िक्र तेरा.........मेरे लम्हें रौशन, हो अगर संग-ए-सफ़र....तमाम राहें रौशन | कैसे वादा करूँ शहर में क़त्ल-ए-आम न हो, बे...
Tuesday, May 24, 2016

भूला नहीं हूँ

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... भूला नहीं हूँ,  पल-पल ---दिल पर ज़ियादती तेरी, दोस्त ------अनजान राहों से,  मुझे कभी कोई ----सरोकार नहीं रहा । –---हर्ष महाजन ...
Sunday, March 20, 2016

दुनियाँ है बदली बदली अब मैं भी बदल गया

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मेरी अगली ग़ज़ल का मुखड़ा :: दुनियाँ है बदली-बदली अब मैं भी बदल गया, जो दिल था हर इंसान में.....जाने किधर गया । -----------------हर्ष महा...
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