इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |
▼
Monday, April 12, 2021
Sunday, August 30, 2020
Wednesday, July 8, 2020
Tuesday, June 30, 2020
Monday, June 29, 2020
Saturday, June 27, 2020
Thursday, June 25, 2020
Monday, June 15, 2020
Friday, May 29, 2020
Thursday, May 28, 2020
Sunday, May 10, 2020
Wednesday, April 8, 2020
Tuesday, April 7, 2020
Monday, April 6, 2020
Tuesday, December 4, 2018
Monday, December 3, 2018
Tuesday, October 2, 2018
Tuesday, August 14, 2018