Sunday, November 22, 2015

खुदकशी करना इतना भी तो आसां नहीं है 'हर्ष'

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खुदकशी करना इतना भी तो आसां नहीं है 'हर्ष',
किस तरह संवरेगी ज़िन्दगी मेरे जाने के बाद |

_________________हर्ष महाजन

Tuesday, November 17, 2015

इक ऐंज दा यार मिन्नू चाही दा ई ( पंजाबी गीत )

पुराणी शायरी से.......
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पंजाबी गीत
इक ऐंज दा यार मिन्नू चाही दा ई,
तेरे वांग दा यार मीनू चाही दा ई |
दिलदार वि होवे मेरी तरहां,
खुशगवार वि हॉवे तेरी तरहां
नीली अखियाँ वाला चाही दा ई |
इक ऐंज दा यार मिन्नू.......

तेरी राहां नु मैं तां ताक्दा रहां
तेरे घर मोहरे मैं तां टापदा रहां
तेरी अखियाँ दे डोरे मैं गिनदा रहां
तेरी जुल्फां च लट वाट पऊंदा रहां
मेरे हत्थां दा ई हार तेन्नु चाही दा ई
तेरे वांग दा यार मिन्नू चाही दा ई |
इक ऐंज दा यार मिन्नू.......

लाल घघरी उड़-उड़ जांदी तेरी
ऐन्नु मोटे घुँघरू तू लवा ले नी
तेन्नु कसम वे मेरे प्यार दी सजनी
गौरे पैरां विच झांझरां पाले नी
तैन्नू मेरे नाल नाचना चाही दा ई |
तेरे वांग दा यार मिन्नू चाही दा ई |
इक ऐंज दा यार मिन्नू.......

घुल जा तूं मिसरी दी डलिए
गौरे रंग ते न इत्तरा तू बल्लिये
लचका के कमर तू आपणी ज़रा
मेरे नाल तूं भंगड़ा पा ले नी
तैन्नु भंगड़ा पाऊणा चाही दा ई
तैन्नू मेरे नाल पाऊंदा चाही दा ई |
तेरे वांग दा यार मिन्नू चाही दा ई |
इक ऐंज दा यार मिन्नू.......
तेरी आख़ च शराब दा रंग कूड़े
तेरे बुल गुलाब दी पंखुड़ी ऐ
तेरी ज़ुल्फ़ ढले ते छाय वे घटा
राब्ब देख के तैन्नू शरमा जायेगी |
मिन्नू ऐदां दा ई सोना यार चाही दा ई
तेरे वांग दा यार मिन्नू चाही दा ई |
इक ऐंज दा यार मिन्नू.......

मेरा दिल हुंकारा भरे सज्जना
मेरी छात्ती ते कांन रख वेख ज़रा
तेरा नाऊँ गाऊंदाए मेरा दिल मित्तरा
तेरे प्यार नु लाबदा ऐ दिल सजणा
तैन्नू मेरे नाल गाऊना चाही दा ई
तेरे वांग दा यार मिन्नू चाही दा ई |
इक ऐंज दा यार मिन्नू.......

_______हर्ष महाजन

Monday, November 2, 2015

मुझे यूँ ही तलब न किया करो अपनी तस्वीरों से

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मुझे यूँ ही तलब न किया करो अपनी तस्वीरों से,
न जाने किस लम्हा ये धड़कन मेरा साथ छोड़ दे |


__________________हर्ष महाजन

कुछ ख्यालात तेरे, संग हैं तन्हाईयाँ मेरी

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कुछ ख्यालात तेरे, संग हैं तन्हाईयाँ मेरी,
इसे तेरा प्यार कहूँ या कहूँ मैं हुनर अपना |

____________हर्ष महाजन

Thursday, October 8, 2015

होगा अफ़सोस अगर रस्म ये अदा की जाए





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होगा अफ़सोस अगर रस्म ये अदा की जाए,
दोस्त ज़ख़्मी हो मगर उसको सज़ा दी जाए |
हमसे पूछोगे ग़ज़ल क्या और क्या है असर,
इक नदी दर्द की, बस आहों से बहा ली जाए |

____________हर्ष महाजन

Monday, October 5, 2015

इतनी करो न हमसे शरारत न यूं कभी

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इतनी करो न हमसे शरारत न यूं कभी,
आँखों से उठ न जाए शराफत न यूं कभी |
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देखे, जो चांदनी में, नहाया तिरा बदन,
हो जाए न शहर में बगावत न यूं कभी |
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वो चाँद जब फलक से कभी इस तरह झुके,
देखी, न इस तरह की , इबादत न यूं कभी |
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आओ, चलें चमन से, कहीं दूर, गुलबदन,
ये चाँदनी, करे न, खिलाफत न यूं कभी |
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चर्चे तिरे, शहर में, जफाओं के, इस तरह,
लगने लगे न दिल में अदालत न यूं कभी |
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_________हर्ष महाजन
221 2121 1221 212

पर निंदा हम सब करें जाग-जाग दिन रात

============दोहे============
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पर निंदा हम सब करें जाग-जाग दिन रात
करम बढावें आपणा बिन करनी बिन घात |
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रख सलीब सर आपने, करो भजन दिन रात,
आपु पार लगाऊ ओ हर पल मुर्शिद साथ |
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निंदा निकल जुबान से, ऐसा खेल दिखाय,
घर इक उजड़े आपणा, पर घर ईंट लगाय |
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मन खेला तु खूब किया, अब गठरी तु ढोये
काल कोठरी में पडा, अब काहे तु रोये |
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जुगत संवारों आपणी, गुर मूरत रख साथ,
कारज खुद कर जायगा, गुर तेरे जब हाथ |
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_________हर्ष महाजन

Wednesday, September 23, 2015

न खेल दिल्लगी का तू कुछ तो खुदा से डर

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न खेल दिल्लगी का तू कुछ तो खुदा से डर,
इतना कहर है, आह में उसकी, सजा से डर |
लेकर बहाना अम्न का पल-पल करे क्लेश,
अपने जहाँ में आग लगे इस अदा से डर |
हर्ष महाजन

Tuesday, September 22, 2015

ऐ ज़िंदगी सलाम तुझे....क्या किया सितम

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ऐ ज़िंदगी सलाम तुझे....क्या किया सितम.
इक पल में दे गयी तू मुझे अतीत और गम |
लखते जिगर को छीन तुम्हें क्या सकूं मिला,
कुछ तो बता कसूर मेरा.......या बता करम |


________हर्ष महाजन

टूटी है दिल के आज मेरे दरम्यान ज़िंदगी

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टूटी है दिल के आज मेरे दरम्यान ज़िंदगी,
जब से हुई है तुझसे मेरी पहचान ज़िन्दगी |

___________हर्ष महाजन

Friday, August 28, 2015

बड़ी मुश्किल से पाला है वो दुश्मन राज़ की खातिर

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बड़ी मुश्किल से पाला है वो दुश्मन राज़ की खातिर,
तेरा भी नाम हो जाए..........मेरा इंतिकाम हो जाए |

______________हर्ष महाजन

Tuesday, August 25, 2015

ऎ खुदा हो सके तो इक बार उनसे मिलने की बारी रखना

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ऎ खुदा हो सके तो इक बार उनसे मिलने की बारी रखना,
वरना अकेली हूँ अपनी अदालत में मेरी भी तैयारी रखना ।

-------------------–-हर्ष महाजन

Tuesday, August 11, 2015

गाफिल, तू मुझको ये बता किस-किस पे नज़र है

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गाफिल, तू मुझको ये बता किस-किस पे नज़र है,
चलना मगर, इस राह की, मुश्किल ये डगर है |

इंसान की तहजीब पर दौलत का है दखल ,
पर भूलता है मुक्तसिर उसका ये सफ़र है |

किस-किस करम से जूझता है आदमी यहाँ,
अब क्या किये, ज़ुल्मो सितम, खुद को भी खबर है |

इतना कहर था बादलों का उजड़ी बस्तियां,
टूटा, लगे बरसात का जितना भी सबर है |

जिनके लिए हंसती रही जो आँखें उम्र भर,
छोड़ा हैं, ऐसा गम वहाँ अब तक वो असर है |

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हर्ष महाजन

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Monday, August 10, 2015

जहाँ दर्द चले मद्धम-मद्दम ( गीत )


गीत
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जहाँ दर्द चले मद्धम-मद्दम, वहां दिल में उमंग भी लंबा रे,
जहाँ हुस्न हुआ बेकल-बेकल, वहां प्यार का रंग भी मंदा रे |
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जब रात हो कटती गरमी में, बरसात में भी बरसात नहीं,
सब वादे वहां फिर दफ्न हुए, हुआ मौसम इश्क का गंदा रे |
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जहाँ फूल खिलें गुलशन-गुलशन, पतझड़ का फिर वहां काम है क्या ,
जहाँ कलियाँ डाल से झरने लगें, माली का उस पर फंदा रे |
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इस शहर की शानो शौकत में, अब इश्क भी नामुमकिन सा हुआ,
हर शाख पे उल्लू बैठे हैं, रंगरलियों का अब ये धंधा रे |
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कभी सूली पर ईमान चढ़ा, कभी फंदा नफरत का था चढ़ा,
पर झूठा सच्चा जो भी चढ़ा, हर बार खुदा का ही बंदा रे |

हर्ष महाजन

Wednesday, July 22, 2015

बरबादियों की...रुदाद ग़ज़ल

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बरबादियों की...रुदाद ग़ज़ल,
बदनामियों का जवाब ग़ज़ल |

हो अजब सी दास्ताँ हुस्न गर,
ज़ख्मों भरी है अज़ाब ग़ज़ल |


ज़िंद से जहाँ हो....गिला बहुत ,
दर्द-ए-निहाँ सी सवाल ग़ज़ल |


बेताबियों का हो......सबब जहाँ,
लबरेज़ हुस्न-ओ-ज़माल ग़ज़ल |


आँखों में अनहद अश्क हो जब,
महरूमियत की मिसाल ग़ज़ल |


हर्ष महाजन



  रुदाद =कहानी

Tuesday, July 21, 2015

कलयुग में खूब बिकेगा वो ईमान ही होगा

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कलयुग में खूब बिकेगा वो ईमान ही होगा,
इंसान का दुश्मन......यहाँ इंसान ही होगा |
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दलदल बनेंगे रिश्ते....हर पोशाक पर पैबंद,
दिल खुद का देखें हम तो बेईमान ही होगा |

जब कासिदों के संग दिखेगा अपना दीवाना,
दुश्मन यहाँ दुश्मन का...कदरदान ही होगा |

आतंकियों की देश में अब जात नहीं होती,
अब दोस्तों मत कहना मुसलमान ही होगा |

बुजदिल करेंगे राज़.......राजदार नहीं होंगे.
नफरत यहाँ पर हर तरफ तूफ़ान ही होगा |

हर्ष महाजन

Monday, July 20, 2015

जो खुश्क हुए थे ज़ख्म, उनमें दर्द आज भी है



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जो खुश्क हुए थे ज़ख्म, उनमें दर्द आज भी है,
वो ज़िंदा हैं तो नहीं, दिल में भ्रम आज भी है | 

मैं जानता हूँ मुझे, उसका कभी इंकार न था,
मगर इस रूह पर, उसका वो क़र्ज़ आज भी है |


दिल बे-जुबां हुआ, शराब साज़-ए-दिल थी बनी,
शर्मिन्दा हूँ मुझे, बेशक वो मर्ज़ आज भी है |


तलाशता हूँ शहर, अज़ाब दिल का कहाँ मैं सहूँ,
किया जो मैंने मुझे, उसकी शर्म आज भी है | 


जलेगा सदियों तलक, इक दिया मज़ार पे अब,
पत्थर हुआ हूँ मगर, मेरा कर्म आज भी है |


हर्ष महाजन

Thursday, July 16, 2015

मुझको इस शहर में…ऐसे भी नज़ारे थे मिले

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मुझको इस शहर में…ऐसे भी नज़ारे थे मिले,
दिन में कातिल कभी रातों को सहारे थे मिले |

वो थे क्या दिन सभी इल्जाम तेरे सर थे लिए,
फर्क इतना सा था बस तुझ से इशारे थे मिले |


जाने कैसा था भंवर दुनियां का हम खो से गए,
ये तो किस्मत थी कि दोनों को किनारे थे मिले |


साज़-ए-दिल बजते रहे महफ़िल-ए-गम चलती रही,
सारी गज़लों में थे पल संग जो गुजारे थे मिले |


जब भी तन्हाई में वो.....बन के आवारा से मिले,
अपनी ज़िन्दगी के “हर्ष’ दिन जो उधारे थे मिले |


हर्ष महाजन

Wednesday, July 15, 2015

मन के साए से तुझे खुद ही रिहा कर दूंगा

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मन के साए से तुझे खुद ही रिहा कर दूंगा,
मेरा वादा है तुझे दिल से जुदा कर दूंगा |

कैसे कर दूं मैं क़त्ल दिल से तेरी चाहत का,
तूने चाहा तो अगर ये भी खता कर दूंगा |


मेरी आँखों से कभी बन दर्द तू टपकेगा,
तेरी खुशियों में मुस्करा के हवा कर दूंगा |


दिल की अब सरहदों पे खूब अँधेरा है अगर,
तो दिल मैं आतिश-ए-जफा से दिया कर दूंगा |


जहाँ में सब का अपना-अपना मुक़द्दर लेकिन,
जो रिश्ता तुझसे जुड़ेगा मैं रिहा कर दूंगा |


हर्ष महाजन

Sunday, July 12, 2015

इन हवाओं से कभी मेरा पता पूछोगे

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इन हवाओं से कभी.....मेरा पता पूछोगे,
किस तरह आता मुझे तेरा नशा पूछोगे |

तूने जो ली थी कसम मुझसे जुदा होने पर,
मेरी धड़कन की सदाओं से सजा पूछोगे |


अब तलक मैंने जलाईं थीं हजारों ही शमा,
यूँ अंधेरों में बता किस से पता पूछोगे |


बेरहम यादें चलीं आहों में आंधी की तरह,
है असर इतना कि कण-कण से खुदा पूछोगे |


जब से रातों में दिखे रूहें जुगनुओं की तरह,
था कहाँ मैंने जलाया था दीया पूछोगे |


_____________हर्ष महाजन