MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Saturday, March 31, 2012

मुझे वो परवाज़ न देना कि वापिस आ न सकूं

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मुझे वो परवाज़ न देना कि वापिस आ न सकूं मिसरों से यूँ जुदा न करना कि तुम्हे पा न सकूं । बहूत लिए हैं इंतकाम बे-रहम दुनिया ने मुझ से बा-...

मेरे दर पर आने वाले तेरी तदबीर बना दूं

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मेरे दर पर आने वाले तेरी तदबीर  बना दूं अलख जगे हो जिसमे ऐसी तस्बीर बना दूं । ______________हर्ष महाजन
Friday, March 30, 2012

वो तलख मोहब्बत की गलियाँ, मुझको जाने क्यूँ रोके हैं

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वो तलख मोहब्बत की गलियाँ, मुझको जाने क्यूँ रोके हैं, फिर सख्त डाल वो अम्बिया की, जहां झूले वो क्यूँ टोके है । फूलों की तरह मैं बिखरा यहाँ...
Thursday, March 29, 2012

कभी हक की रोशनी में कभी हक के फासलों में

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कभी हक की रोशनी में कभी हक के फासलों में, वो ज़िन्दगी में मेरी  जाने कहाँ-कहाँ से गुज़रा । कभी दिल की धडकनों में कभी अश्क के सफ़र में वो ...

ये किस तरह की रौनक तुम किस गली से गुज़रे

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‎ .. ये किस तरह की रौनक हम किस गली से गुज़रे इक ज़िन्दगी थी गुजरी , फिर ज़िन्दगी से गुज़रे । ______________________हर्ष महाजन

भांवो पे तुम्हारे क्या लिखूं

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भांवो पे तुम्हारे क्या लिखूं इकरार लिखूं तकरार लिखूं । शरारत जो देखूं अखियों में , अब प्यार लिखूं इनकार लिखूं । ______हर्ष महाजन

कितना अदब था उसको जब हम बाग़ में जाया करते थे

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कितना अदब था उसको जब हम बाग़ में जाया करते थे सुबहो शाम ले हाथ में हाथ फिर छोले खाया करते थे । न थी परवाह कोई पैसों की न चाह ही बताया करत...

चश्म-ए-तर हुए जाते हैं उनके,मेरी तनख्वाह देखकर

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चश्म-ए-तर हुए जाते हैं उनके,मेरी तनख्वाह देखकर कितना बेबस हूँ मैं, उसे इस तरह लापरवाह देखकर । ____________________हर्ष महाजन

बुज़ुर्ग किया न भूलियो, चल लाठी संग साथ

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हर्ष महाजंस सिक्स लायीनार्स ______________________________ बुज़ुर्ग किया न भूलियो, चल लाठी संग साथ  दुःख में उनको झेलियों, फ़र्ज़ निभा दिन-र...
Wednesday, March 28, 2012

राह-ए-वफ़ा भटके तो किनारा नहीं मिलता

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राह-ए-वफ़ा भटके तो किनारा नहीं मिलता ,   गर फूल टूटे  डाल से दुबारा नहीं खिलता । ___________हर्ष महाजन

मेरी किस्मत शायद पाश-पाश होने को है तैयार

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मेरी किस्मत शायद पाश-पाश होने को है तैयार, ये महेंगायी का दौर तो मेरे घर में भी है बर-करार । किस तरह मनाऊंगा अपनी बीवी को ऐसे दौर में जब दी ...

महंगायी-एक हास्य कविता

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हे प्रिये ! आज मुझे किस तरह बहला रहे हो , बर्गर पीजा की जगह दाल-रोटी खिला रहे हो । प्रेम का रंग किस तरह से चढ़ा आज तुम पर मुझे कार की ज...

किस तरह कमर-तोड़ महंगायी से जूझ रहा हूँ मैं

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.. किस तरह कमर-तोड़ महंगायी से जूझ रहा हूँ मैं वो क्या जाने ये सवाल किस तरह बूझ रहा हूँ मैं । कितना बेबस हूँ सब्जियों के दाम पूछ रहा हूँ म...

वो शख्स मुझे शिकस्त देने की फ़िराक में रहता है

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.. वो शख्स मुझे शिकस्त देने की फ़िराक में रहता है हर बार होता है ध्वस्त,  फिर भी ताक में रहता है। इल्म नहीं है उसे अपने इल्म के दर्जे का अभ...

ख्वाहिश-मंदों की तस्वीरें खींच रहा हूँ मैं

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ख्वाहिश-मंदों की तस्वीरें खींच रहा हूँ मैं याद करूंगा आप लोगों के बीच रहा हूँ मैं । आईने में देखता हूँ चेहरे की सिलवटें रोज़, ढलती उम्र ...

उनके हुनर पर वो अक्सर फब्तियां कसने लगे हैं

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उनके हुनर पर वो अक्सर फब्तियां कसने लगे हैं, आस्तीन में जो सांप थे वो बे-वजह डंसने लगे हैं । क्यूँ सजायी है ये बज़्म कि कला भी दम तोड़ने लगे, ...
Tuesday, March 27, 2012

अपने घर को छोड़ के, चली पराये गाँव

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.. अपने घर को छोड़ के, चली पराये गाँव काट दियो उसि डाल को,डाल तले जिस छाँव। डाल तले जिस छाँव, सजन संग दूजे लागी, वो नार बनी भुजंग, देख ...

पतनी अपनी जात की, एकहू तरकश बाण

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पतनी अपनी जात की, एकहू तरकश बाण मियाँ जी के अगल-बगल, तनी जु तीर-कमान । तनी जु तीर-कमान, यु सौतन कैसे आवे पति होए बेइमान, तो घर कु सर पे उठाव...

वो नहीं है मेरा मगर मैंने इकरार किया है

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वो नहीं है मेरा मगर मैंने इकरार किया है सच कहूं तो उसकी बगावत से प्यार किया है । बे-वफायी तो देखो उसकी रगों में दौड़ रही है भूल इल्लत स...
Monday, March 26, 2012

जुल्मी दरिंदा है फकत उस पर आँख रखना

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जुल्मी दरिंदा है फकत उस पर आँख रखना बहुत दिल फरेब है जरा अहतियात रखना  । ______________हर्ष महाजन
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