MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

▼
Tuesday, October 30, 2012

आज मैंने क्रोध से सब ख़ाक कर दिया

›
... आज मैंने क्रोध से सब ख़ाक कर दिया, खुदा ने अपने रहम से सब माफ़ कर दिया | पल में मेरे वजूद के कुछ पल छलक गए ऍफ़ भी पे मैंने खुद ...

इस कदर यूँ दर्द मेरा आसान कर दिया

›
... इस कदर यूँ दर्द मेरा.........आसान कर दिया , पर रख लबो पे लब मुझे बदनाम कर दिया | इन धडकनों में हम जिन्हें थे खुद सुना किये,...
Monday, October 29, 2012

समंदर से दूर रह कर भी उसने लहरों का मुख मोड़ा है

›
... समंदर से दूर रह कर भी उसने लहरों का मुख मोड़ा है, कितना बे-रहम निकला उसने टूटा दिल फिर से तोडा है | कैसे रुकेगा दर्द-ए-चश्म उसका दरिया ...
Saturday, October 27, 2012

कितना दर्द होता है कब्र पर आने वालों को

›
... कितना दर्द होता है कब्र पर आने वालों को उसके वो ज़ख्म उन्हें आंसू पीने नहीं देते | ______________हर्ष महाजन

मेरी ईद मुबारक तुम ले लो सनम,

›
ईद के इस त्योहार पर सभी दोस्तों को ईद-मुबारक,,ईद-मुबारक,ईद-मुबारक आओ सभी इस मौके पर इक गीत गुनगुनाएं.............. .... मेरी ईद मुबारक ...
Thursday, October 25, 2012

कितने ही जर्क खाएं हैं तुझे पाने के लिए 'हर्ष'

›
... कितने ही जर्क खाएं हैं तुझे पाने के लिए 'हर्ष', मगर हुई इंतिहा आज मुझे आजमाने के लिए | ____________________हर्ष महाजन
Wednesday, October 24, 2012

रावण आजकल सोसायीटियों में भी पनपने लगे हैं

›
... रावण आजकल सोसायीटियों में भी पनपने लगे हैं, शायद इसीलिए 'राम' जगह-जगह धमकने लगे हैं | छुप-छुप कर करते हैं वार पर शून्य मे...

'हर्ष' भी आजकल खूबसूरती में फंसने लगा है

›
... 'हर्ष' भी आजकल खूबसूरती में फंसने लगा है, कुछ नगीने हैं पुराने उन्हें देख हंसने लगा है | कुछ तो होगी वज़ह जो तन्हा दिल बदल गया...

ऐ चाँद तू उसे इतना कहना यहाँ भी इक दिल धड़कता है

›
... ऐ चाँद तू उसे इतना कहना यहाँ भी इक दिल धड़कता है, तू तो बस्ता है दूर इतना यहाँ पे आँखों से लहू बरसता है | ऐ चाँद तू उसे इतना कहना ...

उजाले अपनी यादों के दिल के किसी कोने में रह लेने दो

›
... उजाले अपनी यादों के दिल के किसी कोने में रह लेने दो, न जाने किस वक़्त वो टीस दे दे, उन्हें यूँ ही बह लेने दो | दुश्मन तो बहुत हैं ज़मान...
Saturday, October 20, 2012

मेरे अश्कों की कदर अब यहाँ कहाँ

›
... मेरे अश्कों की कदर अब यहाँ कहाँ , जो गिरें जाने यहाँ अब कहाँ कहाँ | हम वफ़ा करके भी तनहा हैं खड़े, कैसे रुक पाएगी अब ये जुबां कह...
Tuesday, October 16, 2012

शायरी को इस कदर न यूँ महीन कीजिये

›
एक इल्तजा सभी शायरों और शायराओं से ...... +++++++++++++++++++++++++++++ शायरी को इस कदर न यूँ महीन कीजिये अपने कहे शेरों की यूँ न तौहीन की...

मेरी रग-रग में तेरा हुस्न बसा मेरी ग़ज़ल का तड़का जगह-जगह

›
... मेरी रग-रग में तेरा हुस्न बसा मेरी ग़ज़ल का तड़का जगह-जगह, कायनात भी रख दूं सदके तेरे , तेरे हुस्न का चर्चा जगह-जगह । मेरा दिल भी निभाये...

किसने दिए हैं ये दर्द इतने

›
... किसने दिए हैं ये दर्द इतने, शख्स निकले वो कम-ज़र्द जितने| जब-जब ये अश्क उतरें पलक से रुखसार भी होंगे अब ज़र्द उतने | _______हर्ष महाजन...

उसके अंदाज़-ए-बयाँ से परेशाँ हुआ जाता हूँ

›
.. उसके अंदाज़-ए-बयाँ से परेशाँ हुआ जाता हूँ , वो बहुत करीब हैं मेरे पर हैराँ हुआ जाता हूँ | इश्क निभाते हैं मुझसे पर कहते कुछ नहीं ...
Saturday, October 13, 2012

मुहब्बत को इस तरह न तारी होने देना दिल पर

›
... मुहब्बत को यूँ  न तारी होने देना अपने दिल पर   मेरे प्यार का पौधा भी शज़र होने लगा है अब || ___________हर्ष महाजन

कितने ज़ख्म आँखों की सियाही पढेंगे

›
.. कितने ज़ख्म आँखों की सियाही पढेंगे कितने दहशतगर्द आ आ तबाही करेंगे | इन्तहा-ए-ज़ुल्म किस किस को ले डूबेगी, ऐ खुदा ! मासूम कब तक ये त्राही...

ज़िंदगी को इस कदर बदनाम न कीजिये

›
.. ज़िंदगी को इस कदर बदनाम न कीजिये, दिलदार हो तो इस्पे यूँ इल्जाम न दीजिये | वफ़ा करोगे प्यार में बस वफ़ा ही पाओगे, गर न भी हो यकीं मगर इंतक...

आज मुझे कुछ नए खिलौने बनाने हैं

›
... आज मुझे कुछ नए खिलौने बनाने हैं, जिनमें छिपे कुछ राज़ घिनौने हटाने हैं | आज़ाद भगत सुखदेव कभी न आयेंगे, उठाओ उन्हें, अवतार जिन्हो...

जब-जब उठे अहसास, कलम तिलमिलायी है

›
... जब-जब उठे अहसास, कलम तिलमिलायी है पिरो दिया लफ़्ज़ों में फिर इक गज़ल बनायी है | छूट गए रिश्ते सभी अब उठते नए रिवाजों में ग़ज़ल में ...
‹
›
Home
View web version

कुछ मेरे बारे में

My photo
Harash Mahajan
View my complete profile
Powered by Blogger.