MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Wednesday, August 23, 2017

मेरे किस्से मेरी दुनिया भी कोई जाना नहीं

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... मेरे किस्से मेरी दुनिया भी कोई जाना नहीं, दर्द कितना मेरे दिल में था कोई माना नहीं | साथ रहते थे..........तसव्वुर का पता देते थे, पहले ...
Thursday, August 3, 2017

अश्कों की दास्तां है, यूँ ही दर्ज हुआ करती है ऐ 'हर्ष',

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.... अश्कों की दास्तां है, यूँ ही दर्ज हुआ करती है ऐ 'हर्ष', वरना अहसासों से उठे सैलाब ज़िन्दगी को तोड़ देते हैं ।... ----------...

ज़ख्म दर ज़ख्म अपने अहसास इन शेरों में प्रवेश करता हूँ

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.. ज़ख्म दर ज़ख्म अपने अहसास इन शेरों में प्रवेश करता हूँ बस दिल के कुछ टुकड़े हैं जो रोज़ किश्तों में पेश करता हूँ । ___________________...
Thursday, July 20, 2017

इतनी उम्मस है फलक को तू हिलाने वाले

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... इतनी उम्मस है फलक को तू हिलाने वाले, ये घटा बरसेगी कब....दुनियाँ चलाने वाले । ---------------------हर्ष महाजन
Tuesday, July 18, 2017

ये तोपें हिन्द की गर खुल गईं दुश्मन का क्या होगा,

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... ये तोपें हिन्द की गर खुल गईं दुश्मन का क्या होगा, मिटेगा हर निशाँ दुनियाँ के नक्शे से बयाँ होगा । जो घाटी से मुहब्बत की दुहाई दे र...
Saturday, July 15, 2017

तेरे इश्क में गर है जुनूं, मेरी इल्तजा कि खुदा से कर

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... तेरे इश्क में गर है जुनूं, मेरी इल्तजा कि खुदा से कर, तेरा बेवफाई का मन करे तो है ये दुआ तू अदा से कर | तुझे ज़िंदगी की किताब का को...
Monday, May 29, 2017

जब आँखों ही आँखों में, मिलते जवाब

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... जब आँखों ही आँखों में, मिलते जवाब, कह दूँ कैसे नहीं होती उनसे मुलाक़ात | लोग कहते हैं मुझसे...खफा वो जनाब, उठता फिर भी नहीं मे...
Thursday, February 9, 2017

क्षणिका क्या है ?

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“क्षण की अनुभूति को चुटीले शब्दों में पिरोकर परोसना ही क्षणिका होती है।" अर्थात् मन में उपजे एक क्षण के गहन भाव को अपने कम से कम श...
Wednesday, February 8, 2017

दूरियां

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... दूरियां बढाने से दिलों में, प्यार बढ़ता है । मगर दूरियां !! इतनी भी न हों जाएँ कि वो भूल ही जाए । -- हर्ष महाजन

क्षणिका (ऐ दिल)

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क्षणिका ******* ऐ दिल ! धड़को !! खूब धड़को !!! मगर ---- इतना नहीं ? कि अपनी पराकाष्ठा ही भूल जाए । --हर्ष महाजन पराकाष्ठा = चरम ...
Saturday, January 7, 2017

कितने फख्र से लिखा उसने....(क्षणिका)

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कितने फख्र से लिखा उसने.... 100 साल पुरानी पड़्पूंझे की दूकान । अपनी तरक्की दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर गया वो । *** हर्ष महाजन
Sunday, January 1, 2017

आँखों के समंदर में जो ख़्वाबों की है कश्ती

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... आँखों के समंदर में जो ख़्वाबों की है कश्ती ले जाए न भर-भर के वो अरमानों की बस्ती । अफ़साने जो दिल में हैं न अश्क़ों को ले जाएँ ये सोच...
Sunday, December 25, 2016

ग़लतफहमी इतनी कि वफाओं में भी गम निकले

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... ग़लतफहमी इतनी कि वफाओं में भी गम निकले, तूफ़ां उठा ऐसा कि पुराने खत भी सभी नम निकले । हर्ष महाजन

ये कैसा दौर चल निकला

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... रिश्तों में अब अहसासों का, ये कैसा दौर चल निकला, किसी ने....... संवारने में ज़िन्दगी लगा दी, कहीं पिटारी में... नफरतों का बम ...
Monday, December 19, 2016

कितनी दफा

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... कितनी दफा, __अर्ज़ी लगायी है उसके दरबार में, __लगता है ! असर नहीं आया, हमारी दुआओं में अभी । ___हर्ष महाजन

भूला नहीं हूँ (पापा की पाती )

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भूला नहीं हूँ ********* उद्विग्न हूँ, लाचार हूँ । क्या कहूँ, धरा पे खड़ा, मगर बेकार हूँ । सुबह का वक़्त , जाने कितनी रेलगाड़ियां पटर...
Monday, December 12, 2016

काले धन की क्या है कीमत.....रखते जो शौचालयों में

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... काले धन की क्या है कीमत.....रखते जो शौचालयों में, समझे थे धनवान मगर क्या सीख लिया विधालयों में | नज़र पड़ी जब मोदी की तो.......कीमत पड़ ग...

काला-धन

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काला-धन धूम मची है गलियारों में संसद ने क्या अब ठानी है, शोर मचा नोट-बंदी पे ज्यूँ अपनी बात मनवानी है | काले धन के हितकारी जब उठ-उठ...
Wednesday, August 31, 2016

लोग जाने शहर में किस तरह जी रहे हैं

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एक मुक्तक ... लोग जाने शहर में....किस तरह जी रहे हैं, इन हवाओं में शामिल ज़हर तक पी रहे हैं | गाँव जब से उठे हैं....शहर की चाल लेकर,...
Friday, August 19, 2016

भरे काँटों में खिलते फूलों को भी तोड़ना सीखा

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कलयुगी राखी भरे काँटों में खिलते फूलों को भी तोड़ना सीखा, है भैया का ये रिश्ता बहिनों ने तो जोड़ना सीखा | हिफाज़त ज़िन्दगी भर की लिया क...
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