MaiN Our Meri Tanhayii

इस ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव के साथ कई कवि सम्मेलनों और महफ़िलों में शिर्कत करते हुए ज़हन से निकले अहसास, अल्फास बनकर किस तरह तहरीरों में क़ैद हुए मुझे खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ | मेरे ज़हन से अंकुरित अहसास अपनी मंजिल पाने को कभी शेर, नज़्म , कता, क्षणिका, ग़ज़ल और न जाने क्या-क्या शक्ल अख्तियार कर गया | मैं काव्य कहने में इतना परिपक्व तो नहीं हूँ | लेकिन प्रस्तुत रचनाएँ मेरी तन्हाइयों की गवाह बनकर आपका स्नेह पाने के लिए आपके हवाले है उम्मीद है आपका सानिध्य पाकर ये रचनाएँ और भी मुखर होंगी |

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Wednesday, December 31, 2014

किस तरह कर लूं यकीं तुझको मुझसे इश्क नहीं

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… किस तरह कर लूं यकीं तुझको मुझसे इश्क नहीं, गर मैं पत्थर हूँ खुदा मुझको तू हीरा कर दे | ... Kis tarah kar loon yaqeeN tujh...

भूल जाऊँगा उसे एक दिन टूट जाने के बाद

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... भूल जाऊँगा उसे एक दिन टूट जाने के बाद, कौन जाने कब वो ज़ख्म मुझको फकीरा कर दे | Bhool jaooNga usey ek din toot jaane ke baad, ko...
Saturday, December 27, 2014

कितना गहरा था इश्क उसका मेरे लिए

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... कितना गहरा था इश्क उसका मेरे लिए, छोड़ दिया पर मुझे तनहा चलते-चलते | ... kitna gehra tha ishq............uska mere liy...

आखिरी वक़्त कांधा दिया मुझको फिर

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... आखिरी वक़्त कांधा दिया मुझको फिर, मुड के देखा नहीं.....उसने चलते-चलते | ... Aakhiri waqt kaandha diya mujhko phir, Mud k...
Friday, December 26, 2014

अश्कों में डूब गयी वो डोली में सज गयी वो

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… अश्कों में डूब गयी वो.....डोली में सज गयी वो. क्या मैं बे-वफ़ा हूँ उसने, पूछा था चलते-चलते | ... AshqoN meiN doob gayi woh......do...

मुझे इंतज़ार है अब तक...मैं वहीँ पे ही खड़ा हूँ

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... मुझे इंतज़ार है अब तक...मैं वहीँ पे ही खड़ा हूँ, जहाँ अलविदा कहा था आँखों से चलते-चलते | ... Mujhe intzar hai ab tak main wahiN ...
Thursday, December 25, 2014

भूल जाएगा मुझे इतना वो ओछा भी न था

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… भूल जाएगा मुझे इतना वो ओछा भी न था, पर हुनर उसमें ये था ये तो सोचा भी न था | … Bhool jaayega mujhe……...itna woh ochha bhi ...

इश्क के सफ़र में अलविदा बे-शुमार होता है

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... इश्क के सफ़र में अलविदा बे-शुमार होता है , न जाने क्यूँ हर दिल में, ये व्यापार होता है | ... Ishq ke safar meiN alvida be-s...

बहुत सोचता हूँ गुज़रे लम्हों का कभी सफ़र कर लूं

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... बहुत सोचता हूँ गुज़रे लम्हों का कभी सफ़र कर लूं, मगर फिर अपनी बेवकूफियों का अहसास होता है | ... Bahut sochta huN guzre lam...
Wednesday, December 24, 2014

मुद्दत बाद बरसी है मेरी आखें किसी की खातिर

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... मुद्दत बाद बरसी है मेरी आखें किसी की खातिर, इक अरसे बाद दिल की ज़मीं फिर से हरी हुई है | ... Muddat baad barsii haiN me...

लब पे शिकवे और शिकायत तो कभी थी ही नहीं मुझे ऐ 'हर्ष'

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... लब पे शिकवे और शिकायत तो कभी थी ही नहीं मुझे ऐ 'हर्ष,' खोल कर अब अपनी जुबां, अपनी अहमियत घटा न सकूंगा मैं । ... l...

निगाहों के मिलने से दिल मिल जाएँ ये ज़रूरी तो नहीं

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... निगाहों के मिलने से दिल मिल जाएँ ये ज़रूरी तो नहीं, मगर बे-वज़ह ये इत्तफाक बार-बार होता है आजकल | ... Nigahon ke milne se dil...

मुझे अपनी मोहब्बतों का वास्ता तो न दे

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... मुझे अपनी मोहब्बतों का वास्ता तो न दे, दिल पे दिए तेरे ज़ख्म अभी हरे ही तो हैं | ... Mujhe apni mohabbaton ka waasta to n...
Tuesday, December 23, 2014

मेरे दर पर तो इश्क बे-शुमार मगर

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... मेरे दर पर है इश्क........बे-शुमार मगर, अब मुझे खुद ही उसका सहारा न मिला | वो तो देता रहा...........मैं उलझता रहा, ऐसा मंज़र मु...
Monday, December 22, 2014

मुझको ज़िन्दगी में मोहब्बत का किनारा न मिला

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... मुझको ज़िन्दगी में मोहब्बत का किनारा न मिला, मिले पत्थर तो बहुत पर....वो इक इशारा न मिला | मेरी आँखों के नशे में...............त...
Saturday, December 20, 2014

काश हर तरफ अपनों का जिकर हो जाए

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... काश हर तरफ अपनों का जिकर हो जाए, दुश्मन का भी अपनों सा जिगर जो जाए | ... Kaash har taraf apnoN ka zikar ho jaaye, Dusman ...
Friday, December 19, 2014

कोई तालिबान से पूछे कैसा मज़हब है तेरा

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... कोई तालिबान से पूछे कैसा मज़हब है तेरा, वो खुदा तो है सभी का न वो मेरा न है तेरा | इंतिहा पे आया कलयुग दे रहा लहू के दरिया, हुआ बे...

क्यूँ छलकते हैं ये सागर, ऐसे मंज़र क्यूँ यहाँ,

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... क्यूँ छलकते हैं ये सागर, ऐसे मंज़र क्यूँ यहाँ, मुझे कोई ज़ख्म नहीं, दर्द नहीं, गम भी नहीं | ... KyuN chhalakte haiN ye saaGar, aise...

इंतज़ार और अभी और अभी कुछ और अभी

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... इंतज़ार और अभी और अभी कुछ और अभी, ज़रा मैं देख लूं तेरे दिल के हैं साहिल कितने | ... Intezaar our abhi our abhi............kutch ...
Monday, December 15, 2014

नींद आयी ही नहीं चेहरा सा आया बनक

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… नींद आयी ही नहीं........चेहरा सा आया बनकर, चाँद निकल आया मगर बदली से साया बनकर | कौन धरती पे टिके…चाँद को फिर पाने के बाद, बात म...
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