Thursday, October 8, 2015

होगा अफ़सोस अगर रस्म ये अदा की जाए





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होगा अफ़सोस अगर रस्म ये अदा की जाए,
दोस्त ज़ख़्मी हो मगर उसको सज़ा दी जाए |
हमसे पूछोगे ग़ज़ल क्या और क्या है असर,
इक नदी दर्द की, बस आहों से बहा ली जाए |

____________हर्ष महाजन