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Sunday, February 2, 2014

दहलीज़ जहां पर मुर्दों ने आतंक बना अब छोड़ा है

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दहलीज़ जहां पर मुर्दों ने आतंक बना अब छोड़ा है,
संग कलम अहसास से अपने काट नया ये फोड़ा है ।

धरने पे धरना डाल यहाँ, लहू अमन का निचोड़ा है ,
नाल हटा दो खुरों की इनके,  नया-नया ये घोड़ा है ।

वोट बैंक पर घातक हमला, पुराने खिलाड़ी चूक गए ,
कलम करो सब झूठ सभी जो आम जनों में छोड़ा है ।

उठो शहीदो कब्र से अब तुम, भोगी नेता मुर्दार हुए ,

करो हिन्द आज़ाद तुम अपना, इनपे वक़्त भी थोडा है |
भ्रष्टाचार के नाम पे उठते आम जनों को देख लिया,
लूट लिया विश्वास वक़्त भी दिल हर जन का तोडा है ।

______________हर्ष महाजन

Sunday, January 26, 2014

कैसे बीते सभी को मालूम पैंसठ वर्ष आज़ादी के


कैसे बीते सभी को मालूम पैंसठ वर्ष आज़ादी के,
भूल गए सब वीरों को ज्यूँ दिन उनके बर्बादी के ।


क्या दिन थे जब गूँजा करते जुबां पे नाम शहीदों के,
मगर थी पनपी ऐसी सियासत आ गए दिन मनादी के ।

देख अहिंसा गांधी की फिर राजनीति नेहरू की चली,
सुभाष सरीखे शेखर फिर खेले शोले जांबाजी के ।

राजगुरु बटुकेश्वर दत्त भी हुए शहीद फिर उस रण में ,
जहाँ लिखे संग भगत के नारे अंग्रेजो की बर्बादी के ।

भारत छोडो, भारत छोड़ो , हिन्द का नारा आम हुआ,
बजे बिगुल पर टुकड़ों में जब पाक, हिन्द आजादी के ।

आओ चलो फिर हम प्रण लें सब भारत की अखण्डता पर,
कोई पड़ौसी उठे गर समझो रहे तैयार समाधी के ।

जय हिन्द -----जय भारत ----जय-जय हिंदुस्तान

________________हर्ष महाजन

Thursday, August 15, 2013

मैं तो उस दिन भी जंग में शरीक हुआ

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मैं तो उस दिन भी जंग में शरीक हुआ,
जब भारत था जिस दिन तहरीक हुआ |

मादरे हिन्द का चेहरा भी था खुश बहुत,
जब तिरंगा था हिन्द का प्रतीक हुआ |

पर न जाने था कब हिन्द आज़ाद हुआ,
दुनिया जाने गलत क्या था ठीक हुआ |

ये कलम उन शहीदों पे चलती रही ,
जो भी हिन्दू-मुसलमां निर्भीक हुआ |


___________हर्ष महाजन

Sunday, August 11, 2013

पैंसठ इकहत्तर और कारगिल देश को गर अब याद नहीं


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पैंसठ इकहत्तर और कारगिल देश को गर अब याद नहीं,

होगा जग के मानचित्र पर फिर उस देश का नाम नहीं |

अबकी बार जो हुआ युद्ध तो , नया इतिहास बना देंगे,
उठेगा जो जो संग उसके , उसका भी निशाँ मिटा देंगे |

वीर शिवा की धरती पर न समझो कोई महाकाल नहीं,
हिन्दुस्तान की ताकत है, कोई खोखला महाजाल नहीं |


____________________हर्ष महाजन |


Friday, April 13, 2012

ऐसा किला, पहाड़ न नदिया, ऐसा कोई अब सहरा नहीं

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ऐसा किला, पहाड़ न नदिया, ऐसा कोई अब सहरा नहीं
जहां हिंद का परचम अब तक तीन रंग में लहरा नहीं ।

कली-कली हर ड़ाल  पर लिखा 'बोस' 'भगत',आज़ाद यहाँ,
माता गंगा, जमुना विचरित, अजूबा  विश्व का ताज यहाँ ।
भारत देश आज़ाद है जब से कोई दुश्मन यहाँ ठहरा नहीं,
जहां हिंद का परचम अब तक तीन रंग में लहरा नहीं ।
ऐसा किला, पहाड़ न नदिया, ऐसा कोई अब सहरा नहीं
जहां हिंद का परचम अब तक तीन रंग में लहरा नहीं ।

कभी हुआ परिवेश राम का कभी कृष्ण अवतार हुआ
कभी हुआ महाभारत का जंग कभी कंस संहार हुआ ।
ऐसी रामायण, ग्रन्थ न गीता ऐसा कोई रंग गहरा नहीं ,
जहां हिंद का परचम अब तक तीन रंग में लहरा नहीं ।

ऐसा किला, पहाड़ न नदिया, ऐसा कोई अब सहरा नहीं
जहां हिंद का परचम अब तक तीन रंग में लहरा नहीं ।

जम्मू और कश्मीर की खातिर कितनी कोखें उजड़ गयीं,
वीर भगत सिंह सुखदेव जैसे रोज़ जनम यहाँ लेते नहीं ।
ऐसा हिन्दू ,सिख न मुस्लिम ऐसा कोई रिश्ता गहरा नहीं
जहां हिंद का परचम अब तक तीन रंग में लहरा नहीं ।

ऐसा किला, पहाड़ न नदिया, ऐसा कोई अब सहरा नहीं
जहां हिंद का परचम अब तक तीन रंग में लहरा नहीं ।

________________हर्ष महाजन ।

Thursday, March 22, 2012

गद्दारों ने जब जब यहाँ भारत माँ को ललकारा था

गद्दारों ने जब जब यहाँ भारत माँ को ललकारा था,
भारत माँ के योद्धाओं ने इक-इक कर दुत्कारा था ।
जब-जब हुआ हनन देश का बलिदानी अवतार हुए,
अंग्रेजो को सबक सिखाकर अपना इतिहास संवारा था ।
उठो साथिओ मानवता को सत्ताधारी देखो अब लूट रहे
याद करो कुर्बानी उनकी जिहे कण-कण भारत प्यारा था ।

_______________________हर्ष महाजन