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Friday, May 29, 2020

हिचकियाँ


***
यूँ न मजबूर करो
मुझे
अपनी हिचकियों से इस कदर,
मुझे भी तो
ख्याल है
तेरे बे-सब्र जज़्बे का ।

----हर्ष महाजन

Saturday, January 7, 2017

कितने फख्र से लिखा उसने....(क्षणिका)


कितने फख्र से लिखा उसने....

100 साल पुरानी
पड़्पूंझे की दूकान ।

अपनी तरक्की
दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर गया वो ।

***

हर्ष महाजन

Sunday, August 24, 2014

:एक क्षणिका:

...

:एक क्षणिका:
_________
_
|
|

जिस पल
उसने
आँचल से
मुझे उतार दिया |
यूँ लगा !!
ज्यूँ ............
भर हुंकार
खुदा ने
वापिस पुकार लिया !!

~~०~~

____हर्ष महाजन

Monday, December 9, 2013

बे-वफ़ा तो है ……


क्षणिका


कितनी
असरदार है तू !
बे-वफ़ा तो है ……
पर दिल में,
अभी भी
बरकरार है तू !!

__हर्ष महाजन