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Sunday, November 28, 2021

दिल जब तलक आईना है तिरा मुहब्बत का क्या

 दिल जब तलक आईना है तिरा मुहब्बत का क्या,

तू दिल में रहे या सिर्फ मुहब्बत में, तू न हो तो क्या ।


हर्ष महाजन 'हर्ष'

Friday, May 29, 2020

हिचकियाँ


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यूँ न मजबूर करो
मुझे
अपनी हिचकियों से इस कदर,
मुझे भी तो
ख्याल है
तेरे बे-सब्र जज़्बे का ।

----हर्ष महाजन

Thursday, May 28, 2020

आइये समंदर को बदल डालें

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आइये आज समंदर को बदल डालें ,
मेरे  कुछ शेर हैं उनमें वज़न डालें |
मगर बदलूं कैसे बदनसीब मुक़द्दर, 
चलो हाथ की लकीरों में खलल डालें |

_________हर्ष महाजन

मेरा वज़ूद

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ये आईना नहीं,
 मेरे वज़ूद का सबूत है,

वरना कभी कोई, 
मेरा पैरवीकार न होता ।

....हर्ष महाजन

Tuesday, April 7, 2020

गर्दिश ए ज़िन्दगी ने था बदला मुझे

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गर्दिश ए ज़िन्दगी ने था बदला मुझे,
लोग कहने लगे नीम पगला मुझे ।
ठोकरों से नया इक हुआ तजरिबा,
हर क़हर रोशनी दे के निकला मुझे ।

------------हर्ष महाजन 'हर्ष'

होंसला ख़ौफ़ खाने लगा है

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होंसला ख़ौफ़ खाने लगा है,
रुख हवा का बताने लगा है ।
पूछ लेना निकलने से पहले, 
वक़्त यूँ भी डराने लगा है ।

----------हर्ष महाजन 'हर्ष'

Tuesday, December 4, 2018

कितनी यादें छिपी हैं उनकी खामोश आंखों में

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कितनी यादें छिपी हैं उनकी खामोश आंखों में,
डर लगता है कहीं उफ़क न पड़ें मेरे आने से ।

--------------हर्ष महजन

Monday, December 3, 2018

करता रहा उम्र-भर नफरत जिस शख्स से

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करता रहा उम्र-भर नफरत जिस शख्स से,
जुदा हुआ तो कतरा इक मेरी आँखों में था,

यत्न तो किये थे मैने कि उसे भूल ही जाऊँ, 
मगर क्या करूँ वो दिल की सलाख़ों में था ।

----------------हर्ष महाजन

Sunday, July 8, 2018

आज सूना हो गया

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आज सूना हो गया दिल तेरे फिर* जाने के बाद,
सोचता हूँ होगा फिर क्या तेरे फिर आने के बाद ।

-------------------------हर्ष महाजन

*बदल

2122-2122-2122-212

Monday, February 19, 2018

हद से ज़्यादा प्यार करना भी गुनाह हो गया


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हद से ज़्यादा प्यार करना भी गुनाह हो गया,
वो रिश्ता कुछ यूं बना कि घर तबाह हो गया ।

------------------------हर्ष महाजन

Monday, February 12, 2018

ख़्वाबों का सिलसिला क्या बताऊँ ऐ 'हर्ष,



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ख़्वाबों का सिलसिला क्या बताऊँ ऐ 'हर्ष,
हालात-ए-इश्क से बे-खबर लगता है शायद तू |

_______हर्ष महाजन

यूँ ही मुहब्बत में बर्बाद होना किसे अच्छा लगता है


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यूँ ही मुहब्बत में बर्बाद होना किसे अच्छा लगता है,
मगर हौंसिले बुलंद हों तो हर ज़ख्म सुहाना लगता है |

_______________________हर्ष महाजन

इतना भी तो आसां नहीं किसी शेर को कह पाना


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इतना भी तो आसां नहीं किसी शेर को कह पाना,
इक-इक लफ्ज़ मुहब्बत हार कर पिरोना पड़ता है |

___________________हर्ष महाजन

कुछ दर्याफ़्त करना भी अब गुनाह सा लगता है,


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कुछ दर्याफ़्त करना भी अब गुनाह सा लगता है,
भुला दो तुम भी वो लम्हें यही वफ़ा सा लगता है |

___________________हर्ष महाजन

Thursday, August 3, 2017

अश्कों की दास्तां है, यूँ ही दर्ज हुआ करती है ऐ 'हर्ष',

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अश्कों की दास्तां है, यूँ ही दर्ज हुआ करती है ऐ 'हर्ष',
वरना अहसासों से उठे सैलाब ज़िन्दगी को तोड़ देते हैं ।...

--------------------–हर्ष महाजन

ज़ख्म दर ज़ख्म अपने अहसास इन शेरों में प्रवेश करता हूँ

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ज़ख्म दर ज़ख्म अपने अहसास इन शेरों में प्रवेश करता हूँ
बस दिल के कुछ टुकड़े हैं जो रोज़ किश्तों में पेश करता हूँ ।

_______________________हर्ष महाजन ।

Thursday, July 20, 2017

इतनी उम्मस है फलक को तू हिलाने वाले

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इतनी उम्मस है फलक को तू हिलाने वाले,
ये घटा बरसेगी कब....दुनियाँ चलाने वाले ।

---------------------हर्ष महाजन

Sunday, December 25, 2016

ग़लतफहमी इतनी कि वफाओं में भी गम निकले

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ग़लतफहमी इतनी कि वफाओं में भी गम निकले,
तूफ़ां उठा ऐसा कि पुराने खत भी सभी नम निकले ।

हर्ष महाजन

Wednesday, August 10, 2016

यूँ किस्से अपने लिक्खे खूब उसने खुद सफीनों पर

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यूँ किस्से अपने लिक्खे खूब उसने खुद सफीनों पर,
मेरी इच्छा है वो गजलों में सब तब्दील हो जाएँ |

हर्ष महाजन

1222-1222-1222-1222

Saturday, July 23, 2016

कब तलक निभाओगे ये दिखावटी रिश्ते,

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कब तलक निभाओगे ये दिखावटी रिश्ते,
कब तलक बताओ तुम गफलत में रहोगे ।

----------------हर्ष महाजन