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Thursday, March 1, 2018

आओ चढ़ा के रंग होली का मिला करें

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आओ चढ़ा के रंग.. होली... .का मिला करें,
दिल में जगा के प्यार को आओ...दुआ करें ।
नीला हो या पीला हो या हो रसंग अब लाल,
रिश्तों में सब मिला के नया सिलसिला करें ।

हर्ष महाजन


Tuesday, February 20, 2018

काश आज भी पुराना जमाना होता,


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काश आज भी......पुराना जमाना होता,
तुझ संग मेरा भी....इक अफसाना होता ।
कुछ भी बदल लेते..हाथों की लकीरों में,
पर ज़िन्दगी का सफर खूब सुहाना होता ।

----------------हर्ष महाजन

Monday, February 19, 2018

इश्क़ तक तुझे तैयार करूँ ज़ायज़ नहीं लगता


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इश्क़ तक तुझे तैयार करूँ ज़ायज़ नहीं लगता,
अनचाहा फिर खुमार भरूँ ज़ायज़ नहीं लगता ।
चाहत तो है तेरे हुस्न का दीदार कर लूँ मगर,
दहलीज़ पे इंतज़ार करूँ...ज़ायज़ नहीं लगता ।

----------------हर्ष महाजन

Monday, February 12, 2018

फासला रखना हमेशा अच्छे हों जितने ये लोग


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फासला रखना हमेशा अच्छे हों जितने ये लोग,
होती मीठी सी ज़ुबाँ अंदर से ज़हरीले ये लोग ।
मुस्कुराते रहते हैं ये......फूल कांटों संग भी,
ये हुनर सिखला दे कोई क्यूँ हैं पथरीले ये लोग ।

-----------------हर्ष महाजन

Monday, November 13, 2017

ये लफ्ज़ मेरे, सोच मेरी, नग्में भी मेरे,

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ये लफ्ज़ मेरे, सोच मेरी, नग्में भी मेरे,
अब जाने क्यूं ख्याल सभी उनमें हैं तेरे  ।
ये शाम भी हँसी-हँसी है वक़्त में वफा,
फ़िर जाने तेरी यादों में आँसू है क्यूँ मेंरे ।

--------------------हर्ष महाजन

221 2121 1221 212

Saturday, November 11, 2017

चलो आज उन्हें बता कर देखते हैं

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चलो आज उन्हें बता कर देखते हैं,
तसव्वुर दिल के जता कर देखते हैं ।
बहुत खेल ली खुद से आंख मिचौली,
चलो आज उन्हें मना कर देखते हैं ।

-------------हर्ष महाजन

Wednesday, August 23, 2017

मेरे किस्से मेरी दुनिया भी कोई जाना नहीं


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मेरे किस्से मेरी दुनिया भी कोई जाना नहीं,
दर्द कितना मेरे दिल में था कोई माना नहीं |
साथ रहते थे..........तसव्वुर का पता देते थे,
पहले दीवाने बहुत... अब कोई दीवाना नहीं |

____________हर्ष महाजन

Saturday, July 15, 2017

तेरे इश्क में गर है जुनूं, मेरी इल्तजा कि खुदा से कर

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तेरे इश्क में गर है जुनूं, मेरी इल्तजा कि खुदा से कर,
तेरा बेवफाई का मन करे तो है ये दुआ तू अदा से कर |

तुझे ज़िंदगी की किताब का कोई हर सफा क्यूँ सौंप दे,
जो हिफाज्तें तू न कर सका उनको खुदा की दुआ से कर |

---------------हर्ष महाजन

Monday, May 29, 2017

जब आँखों ही आँखों में, मिलते जवाब



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जब आँखों ही आँखों में, मिलते जवाब,
कह दूँ कैसे नहीं होती उनसे मुलाक़ात |
लोग कहते हैं मुझसे...खफा वो जनाब,
उठता फिर भी नहीं मेरे लब पे सवाल |

हर्ष महाजन

Sunday, January 1, 2017

आँखों के समंदर में जो ख़्वाबों की है कश्ती

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आँखों के समंदर में जो ख़्वाबों की है कश्ती
ले जाए न भर-भर के वो अरमानों की बस्ती ।
अफ़साने जो दिल में हैं न अश्क़ों को ले जाएँ
ये सोच के बचपन की तड़प भूले वो मस्ती ।

--------------हर्ष महाजन

221 1221 1221 112

Wednesday, August 31, 2016

लोग जाने शहर में किस तरह जी रहे हैं

एक मुक्तक

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लोग जाने शहर में....किस तरह जी रहे हैं,
इन हवाओं में शामिल ज़हर तक पी रहे हैं |
गाँव जब से उठे हैं....शहर की चाल लेकर,
तब से चादर ग़मों की....शहरिये सी रहे हैं |
हर्ष महाजन 'हर्ष'

Monday, June 20, 2016

तेरे मसलों में न जाने किस जगह मंजिल मिले



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तेरे मसलों में न जाने किस जगह मंजिल मिले,
इतना भी अनमोल न रखना दिल में बस रंजिश मिले |
कौन जाने किस सफ़र में कोई कब आकर मिले,
मुझको लफ़्ज़ों में यूँ रखना राग में बंदिश मिले |

हर्ष महाजन

बहरे रमल मुसम्मन महफूज़
2122-2122-2122-212
*आपकी नज़रों ने समझा प्यार के काबिल मुझे

Sunday, June 12, 2016

ऐ सनम तुझपे इतना नूर किधर से आता है

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ऐ सनम तुझपे इतना नूर किधर से आता है,
है फलक पर भी वो चन्दा उधर शरमाता है ।

तेरी साँसों की कसम मुझको हवाओं की कसम,
तेरे हर नक्श में हमदम सा नज़र आता है |

हर्ष महाजन

Wednesday, May 25, 2016

सिर्फ इक ज़िक्र तेरा.........मेरे लम्हें रौशन

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सिर्फ इक ज़िक्र तेरा.........मेरे लम्हें रौशन,
हो अगर संग-ए-सफ़र....तमाम राहें रौशन |
कैसे वादा करूँ शहर में क़त्ल-ए-आम न हो,
बे-नकाब हुस्न तेरा......और निगाहें रौशन |

_______________हर्ष महाजन

Friday, March 4, 2016

तेरे हिस्से की मैंने दिल में इक सौगात रक्खी है

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तेरे हिस्से की मैंने दिल में इक सौगात रक्खी है,
ज़रा आओ तो परदे में.....ज़मीं आज़ाद रक्खी है |
तेरे कूचे की मुझको......यादें क्यूँ जीने नहीं देतीं,
नज़र भर देख आँखों में वो शय आबाद रक्खी है |
______हर्ष महाजन

Saturday, February 27, 2016

ऐसा सैलाब अब...मेंरी आखों में क्यूँ

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ऐसा सैलाब अब...मेंरी आखों में क्यूँ ,
ख्वाब मेरे मुसलसल सलाखों में ज्यूँ |
था सुना इश्क पर......है खुदा मेहरबां,
फिर उठा अंजुमन से वो लाखों में क्यूँ |

___________हर्ष महाजन

इस कदर से थका हूँ ज़िंदगी से मैं अब

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इस कदर से थका हूँ ज़िंदगी से मैं अब,
कोई अच्छा लगे भी तो इज़हार न हो |
कैसे मानू तू रग-रग में शामिल सदा,
जब तलक दिल से कोई भी इकरार न हो |

___________हर्ष महाजन

कुछ हैं रिश्ते मेरे संग नाकाम से

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कुछ हैं रिश्ते मेरे संग नाकाम से ,
हैं मेरे वो मगर कुछ हैं बदनाम से |
हूँ पशोपेश में छोडूं उनका सफ़र,
हैं टिके जो मेरी खुशियों के दाम से |
___________हर्ष महाजन

Wednesday, January 6, 2016

कितना गजब करता हूँ

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कितना गजब करता हूँ,
उनसे इतना डरता हूँ |
मुंहतोड़ जवाब देती वो,
फिर भी उसपे मरता हूँ | 

___हर्ष महाजन

हिन्दूसितां की धरती पर अब सियासत क्यूँ मुरदार हुई

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हिन्दूसितां की धरती पर.....सियासत क्यूँ मुरदार हुई,
छोड़ मुहब्बत की ये कसमें, बुजदिली क्यूँ किरदार हुई |
लहू जवानों का जब उबला....दुश्मन इक-इक ढेर हुआ,
देख शहादत, इनकी फिर भी.... अक्लें, क्यूँ बीमार हुई |

____________हर्ष महाजन