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Monday, October 5, 2015

पर निंदा हम सब करें जाग-जाग दिन रात

============दोहे============
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पर निंदा हम सब करें जाग-जाग दिन रात
करम बढावें आपणा बिन करनी बिन घात |
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रख सलीब सर आपने, करो भजन दिन रात,
आपु पार लगाऊ ओ हर पल मुर्शिद साथ |
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निंदा निकल जुबान से, ऐसा खेल दिखाय,
घर इक उजड़े आपणा, पर घर ईंट लगाय |
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मन खेला तु खूब किया, अब गठरी तु ढोये
काल कोठरी में पडा, अब काहे तु रोये |
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जुगत संवारों आपणी, गुर मूरत रख साथ,
कारज खुद कर जायगा, गुर तेरे जब हाथ |
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_________हर्ष महाजन

Friday, March 27, 2015

तुझको देख यहाँ हँस रहा हूँ ज़रू

नज़्म
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तुझको देख यहाँ.........हँस रहा हूँ ज़रूर,
तुझपे मरता हूँ.......ये न समझना हजूर |
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मैं हूँ खुदगर्ज़ भी........मतलबी भी बहुत,
इल्तिजा अर्थी संग.....मेरी चलना ज़रूर |
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रूह सिजदा किये........रात-दिन अब तेरा,
पर करूँ नित नए......करम होके मजबूर |
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अब समंदर की कब से........तलाश मुझे,
कर दो मिटटी दे दो......चार काँधे हजूर |
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मैं भटकता हूँ सदियों से.........संसार में,
अब तजूं जग मैं तेरा तो मिलना ज़रूर |
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________हर्ष महाजन

Monday, May 6, 2013

ऐ मोहब्बत तेरी खातिर अपनी जाँ पे उतरे



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ऐ मोहब्बत तेरी खातिर अपनी जाँ पे उतरे,
बे-ख़ौफ़ टूटी कश्ती दरिया में ले के उतरे |

सुफिआना ज़िंदगी है सुफिआना तेरा रस्ता,
हम चीर के भंवर को तेरी दास्ताँ पे उतरे |

मैं खड़ा हूँ सरहदों पे मन कैदी हो गया हैं,
ऐ खुदा इसकी खातिर अपने घर से उतरे |

ये विकारों के झमेले आ आ मुझ से खेलें,
हम खेल-खेल में इनको सागर में ले के उतरे |

___________हर्ष महाजन   

Sunday, November 4, 2012

अल्लाह इस फकीरी में कितना मज़ा है


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अल्लाह इस फकीरी में कितना मज़ा है,
तू मुझ में,मेरा सब तो तुझ में सजा है |

तू मालिक है सबका रखवाला जहां का,
हमको  ज़िन्द वो दो जो तेरी रज़ा है |

अब तुझ सी मुहब्बत कहीं पर नहीं है,
जो इश्क में बहें अश्क उसी में मज़ा है |

अब जुर्म-ए-तमन्ना का डर भी बहुत है,
परत दर परत अब सजा भी कज़ा है |

मेरे सब्र की तू आजमाईश करे क्यूँ ,
मैं हुस्न-ए-जाँ हूँ तेरा तू मेरी फ़ज़ा है |

_______________हर्ष महाजन


Wednesday, October 24, 2012

'हर्ष' भी आजकल खूबसूरती में फंसने लगा है

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'हर्ष' भी आजकल खूबसूरती में फंसने लगा है,
कुछ नगीने हैं पुराने उन्हें देख हंसने लगा है |
कुछ तो होगी वज़ह जो तन्हा दिल बदल गया,
खुदा की इबादत है जिसमें वो धंसने लगा है |


________________हर्ष महाजन

Sunday, October 7, 2012

ज़िंदगी की ये सच्चाई कोई समझेगा नहीं

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ज़िंदगी की ये सच्चाई कोई समझेगा नहीं ,
जब तलक पाये न खुदा को समझेगा नहीं |
यहाँ अपनी ही तमन्नाएं उस पर काबिज हैं,
जब तलक गुजरे न खुद पे वो समझेगा नहीं |

इतना अहसान किया खुद खुदा ने सब पे यूँ ,
खुद आये दिया नाम पर कोई समझेगा नहीं |
इतनी आसान दी तरकीब खुदा को पाने की ,
पर ये मन है कि समझाने पे समझेगा नहीं |

अब कितना भी करो विलाप दुनिया के आगे,
अब खुदा भी बिन मेहनत अब समझेगा नहीं |
कुछ दें वक़्त खुदा को अपनी ज़िन्द के वास्ते,
गर यूँ हि करें पर्यास खुदा भि समझेगा नहीं |

_______________हर्ष महाजन

Wednesday, August 15, 2012

बाबा फाटक खोल अब........देखूं दीप प्रकाश

..

___सुफिआना

बाबा फाटक खोल अब........देखूं दीप प्रकाश
जन्म-जन्म मैं ढोलता,बुझी न अब तक प्यास ।

________________हर्ष महाजन ।

Saturday, August 11, 2012

दोहे--बाबा इतनी भीड़ में कैसे करूँ सलाम

दोहे --सुफिआना

बाबा इतनी भीड़ में कैसे करूँ सलाम ,
तीजे तिल खड़ा हुआ,देखा तेरो नाम ।

रौशन सारा जग हुआ,देह हुई निष्काम,
मन के सारे भ्रम तजे ,पहुंचा मैं निज धाम ।

___________हर्ष महाजन ।

Sunday, August 5, 2012

हर्षा सुख तू छोड़ दे नाम जपो दिन रात

सुफिआना
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हर्षा सुख तू छोड़ दे नाम जपो दिन रात
तीसरे तिल पे चल रहि सच-खंड धुन सौगात ।

__________________हर्ष महाजन ।

'हर्षा' मन लालच भरा बाबा तू कुछ बोल

'हर्षा' मन लालच भरा बाबा तू कुछ बोल
राधास्वामी नाम का रस मुझ अंदर घोल ।

_________हर्ष महाजन ।

Thursday, March 8, 2012

दोहा - नौकर करे न चाकरी,



नौकर करे न चाकरी, मालिक करे सवाल,
माया कटी जब शाम कु,फिर वो करे बवाल ।

____________________हर्ष महाजन

होली मन पावन हुई, राधा हुई धमाल

होली मन पावन हुई, राधा हुई धमाल,
'हरषा' ने जब रंग दिया, चारों ओर गुलाल।

होली संग फागुन चढ़ा, रंग दिया मंच गुलाल,
शायरों की महफ़िल सजी, न कर कोई मलाल ।

________________हर्ष महाजन

राधा-स्वामी बिनती और प्रार्थना के शब्द

Radha Soami

राधा-स्वामी बिनती और प्रार्थना के शब्द
करूँ बिनती दाऊ कर जोरी
अर्ज़ सुनो राधास्वामी मोरी ।

सत-पुरुष  तुम सत्-गुरु दाता
सब जीवन के  पिता और माता
  दया धार  अपना  कर  लीजे
काल  जाल  से  न्यारा  कीजे
सतयुग  त्रेता  दयापर  बीता
काहू  न  जानी  सबद की  रीता
कलियुग  में  स्वामी  दया  विचारी
परगट  करके  सबद पुकारी 
जीव  काज  स्वामी  जग  में  आये
भाव-सागर  से  पार  लगाये 
तीन  छोर  चौथा  पद  दीन्हा
सत्तनाम  सतगुरु  गत  चीन्हा
जगमग  जोत  हॉट  उजियारा
गगन  सोत  पर  चन्द्र  निहारा
सेत  सिंघासन  छात्र  बिराजे ,
अनहद  शब्द  गैन धुन  गाजे
क्षर  अक्षर निअक्षर  पारा
बिनती  करे  जहां  दास  तुम्हारा
लोक  अलोक  पा 'उन  सुख धामा
चरण  सरन  दीजे  बिसरामा
लोक  अलोक  पा 'उन  सुख  धामा
चरण  सरन  दीजे  बिसरामा
करूँ  बिनती  दो'उ  कर जोरी
सोअमी दो'उ  कर  जोरी
अर्ज़  सुनो  राधास्वामी  मोरी 

दिल पे रंग उसका चढ़े , न चढ़े अब दूजा रंग

राधास्वामी जी


दिल पे रंग उसका चढ़े , न चढ़े अब दूजा रंग
होली है रंग प्यार का , बाकि रंग सब बदरंग ।
बाकि रंग सब बदरंग , ये मन के रंग अलग हैं
भर इन्हें अब ज़िन्द में, पड़े जो अलग थलग हैं ।
कहे 'हर्ष' तू समझ, ये रंगों की अब झिलमिल ,
न रंग दिल होली से ,खुदा के रंग से रंग दिल ।


_________________हर्ष महाजन