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Thursday, May 7, 2015

चुगली निकल ज़ुबान से, अदभुत खेल दिखाय





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चुगली
चुगली निकल ज़ुबान से, अदभुत खेल दिखाय,
रिश्तों में इंसान के, तुरत फेर पड़ जाय |
तुरत फेर पड़ जाए, करावे जंग दुतरफे,
सब भुजंग बन जांय , जु इक-इक जां को तरसे,
कहे 'हर्ष' दो पलट, चुगल-खोरों की गुगली,
इक-इक करके पकड़, झटक दो करे जु चुगली||
हर्ष महाजन



कुण्डलिया छंद
पुराणी कृति






Monday, May 19, 2014

आस्तीन के सांप कभी दर्शन खुद न देई

कुण्डलिनी छंद
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आस्तीन के सांप कभी........दर्शन खुद न देई,
अंग अंग अपना कहे.......ज्यूँ इक वही स्नेही,
ज्यूँ इक वही स्नेही.....बाकि हर दुश्मन लागे,
समझ लगी जब बात, कटे तब तक सब धागे |
____________हर्ष महाजन

Sunday, August 25, 2013

हर्षा इस संसार में, शिकवों का भण्डार


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हर्षा इस संसार में, शिकवों का भण्डार,
बात-बात बे-बात अब, उगले वो  अंगार |
उगले वो अंगार, रहा हरसु वो बगल में,
छुप-छुप करे उ वार, शख्स वो शुगल-शुगल में|
कहे 'हर्ष' समुझाए, शिकवों पर करो न खर्चा,
दिल को करो दबंग, है जब तक संग हर्षा |

________________हर्ष महाजन

Monday, August 12, 2013

गद्दारों के देश में अब, खुद ही सब अवतार

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गद्दारों के देश में अब, खुद ही सब अवतार,
फौजी दस्ते लूटकर ,जहाँ बने सरकार |
जहाँ बने सरकार , साजिशें रोज़ बनायें,
भोली सी आवाम , सहे आतंकी सजाएं |
कहे ‘हर्ष’ दो पलट, देश के सभी खुद्दारों,
उठाओ जंगी तोप, दाग बोल के गद्दारों |

______________हर्ष महाजन

Sunday, June 2, 2013

कुण्डलिया छंद


कुण्डलिया छंद

कुण्डलिया है जादुई, छन्द श्रेष्ठ श्रीमान|

दोहा रोला का मिलन, इसकी है पहिचान||
इसकी है पहिचान, मानते साहित सर्जक|
आदि-अंत सम-शब्द, साथ बनता ये सार्थक|
लल्ला चाहे और, चाहती इसको ललिया|
सब का है सिरमौर छन्द, प्यारे, कुण्डलिया||

__________ NAVIN C. CHATURVEDI


कुण्डलिया छन्द का विधान उदाहरण सहित

कुण्डलिया है जादुई
2112 2 212 = 13 मात्रा / अंत में लघु गुरु के साथ यति
छन्द श्रेष्ठ श्रीमान|
21 21 212 = 11 मात्रा / अंत में गुरु लघु
दोहा रोला का मिलन
22 22 2 111 = 13 मात्रा / अंत में लघु लघु लघु [प्रभाव लघु गुरु] के साथ यति
इसकी है पहिचान||
112 2 1121 = 11 मात्रा / अंत में गुरु लघु
इसकी है पहिचान,
112 2 1121 = 11 मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
मानते साहित सर्जक|
212 211 211 = 13 मात्रा
आदि-अंत सम-शब्द,
21 21 11 21 = 11 मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
साथ, बनता ये सार्थक|
21 112 2 211 = 13 मात्रा
लल्ला चाहे और
11 22 21 = 11 मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
चाहती इसको ललिया|
212 112 112 = 13 मात्रा
सब का है सिरमौर
11 2 2 1121 = 11 मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
छन्द प्यारे कुण्डलिया||
21 22 2112= 13 मात्रा

साभार

हर्ष महाजन