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Tuesday, April 7, 2020

गर्दिश ए ज़िन्दगी ने था बदला मुझे

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गर्दिश ए ज़िन्दगी ने था बदला मुझे,
लोग कहने लगे नीम पगला मुझे ।
ठोकरों से नया इक हुआ तजरिबा,
हर क़हर रोशनी दे के निकला मुझे ।

------------हर्ष महाजन 'हर्ष'

होंसला ख़ौफ़ खाने लगा है

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होंसला ख़ौफ़ खाने लगा है,
रुख हवा का बताने लगा है ।
पूछ लेना निकलने से पहले, 
वक़्त यूँ भी डराने लगा है ।

----------हर्ष महाजन 'हर्ष'

Monday, December 3, 2018

करता रहा उम्र-भर नफरत जिस शख्स से

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करता रहा उम्र-भर नफरत जिस शख्स से,
जुदा हुआ तो कतरा इक मेरी आँखों में था,

यत्न तो किये थे मैने कि उसे भूल ही जाऊँ, 
मगर क्या करूँ वो दिल की सलाख़ों में था ।

----------------हर्ष महाजन

Friday, May 4, 2018

क्यूँ न अश्कों का साथी बनूँ हमसफर

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क्यूँ न अश्कों का साथी बनूँ हमसफर,
जी रहा  बिन तेरे ज़िन्दगी का सफर ।
 आओ ठहरो तसव्वर में कुछ देर सँग,
हिज़्र कैसे सहूँ कैसे दूँ ये खबर ।

हर्ष महाजन
212/212/212/212

Monday, December 12, 2016

काले धन की क्या है कीमत.....रखते जो शौचालयों में

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काले धन की क्या है कीमत.....रखते जो शौचालयों में,
समझे थे धनवान मगर क्या सीख लिया विधालयों में |
नज़र पड़ी जब मोदी की तो.......कीमत पड़ गयी भारी,
दो और दो जो चार करे थे........रह गये सब ख्यालों में |

हर्ष महाजन

Wednesday, August 31, 2016

लोग जाने शहर में किस तरह जी रहे हैं

एक मुक्तक

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लोग जाने शहर में....किस तरह जी रहे हैं,
इन हवाओं में शामिल ज़हर तक पी रहे हैं |
गाँव जब से उठे हैं....शहर की चाल लेकर,
तब से चादर ग़मों की....शहरिये सी रहे हैं |
हर्ष महाजन 'हर्ष'