Sunday, February 2, 2014

कैसे दर-किनार करूँ , दिल से तुझे प्यार करूँ



कैसे दर-किनार करूँ , दिल से तुझे प्यार करूँ ,
मुझको समझाया बहुत फिर भी बार-बार करूँ ।

खुद को तनहा भी किया,  ज़ख्म नासूर भी हुए,
दुनियाँ जालिम भी कहे,   कहे तो इकरार करूँ ।

तुने इश्क़ बदले बहुत, मगर उसे समझा नहीं,
कहर उसमें जो सहा ,  कहो तो इज़हार करूँ । 

वैसे तो अच्छा ही हुआ, तू जो बेवफा ही हुआ ,
लबों पे हैं नाम बहुत,  क्यूँ मैं अश्क़बार करूँ ।

मौत का खौफ नहीं, ग़मों का संग था जो तेरा,
आखिर थाम लूँगा तुझे, क्यूँ न ऐतबार करूँ ।

______________हर्ष महाजन