Saturday, February 22, 2014

लड़कपन में बचपन संग बीता जवानी में क्यूँ भूख ज्यादा है



लड़कपन में बचपन संग बीता जवानी में क्यूँ भूख ज्यादा है,
मेरा हलक अब, बातों से उनकी, न जाने क्यूँ सूख जाता है।
काज़ल बिखरा ज़ुल्फ़ें भी बिखरीं बिखरा हुआ अब सावन है,
दिल में छुपा हर नगमा वो जाने चुपके से क्यूँ कूक जाता है ।

_________________हर्ष महाजन