Wednesday, March 9, 2016

अगर दिल पर मेरे उसका कभी इख्तियार हो जाता

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अगर दिल पर मेरे उसका कभी इख्तियार हो जाता,
ये हस्ती तक बिखर जाती मुझे इंतज़ार हो जाता |
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मैं कुछ अपने गुनाहों से परेशांन और मुमकिन ये,
कभी मैं खोल देता दिल वो फिर राजदार हो जाता |

ये तो अच्छा हुआ वो रूठ कर बस चल दिए मुझसे,
अगर तीरे नज़र चलता तो दिल आर-पार हो जाता |

अमानत थी किसी की फिर भी दिल काबू में रख पाना,
कशिश इतनी थी आँखों में ये दिल तार-तार हो जाता |

बिछुड़ के रो चुका हूँ बे-वजह उस पे था दिल इतना,
न पगलाता ज़हन मेरा तो मैं होशियार हो जाता |

हर्ष महाजन