Tuesday, February 26, 2013

कितना पुरअसर होता है ये फासला ज़िन्दगी में ऐ 'हर्ष'

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कितना पुरअसर होता है ये फासला ज़िन्दगी में ऐ 'हर्ष'
यादों के निशाँ भी दिल-ओ-दिमाग से नदारद हुए जाते हैं |

__________________________हर्ष महाजन