Friday, December 19, 2014

कोई तालिबान से पूछे कैसा मज़हब है तेरा

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कोई तालिबान से पूछे कैसा मज़हब है तेरा,
वो खुदा तो है सभी का न वो मेरा न है तेरा |
इंतिहा पे आया कलयुग दे रहा लहू के दरिया,
हुआ बे-रहम वो इतना अब न मेरा न है तेरा |


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Koii Taalibaan se pooche...... kaisa mazhab hai tera,
Wo khuda toh hai sabhi ka na woh mera na hai tera.
Intehaa pe aayaa kalyug....de rahaa lahu ke dariyaa,
Hua be-rahem woh itnaa......ab na mera na hai tera.

___________हर्ष महाजन