Saturday, August 13, 2011

मेरी मैय्यत


KyuN meri mayyat pe Deeya jalane aate ho
Dil ke Zakhm ab kyuN sehlaane aate ho
NahiN bhool sakta tere diye zakhoN ka wo sailaab
Ab kyuN meri soyi rooh ko tadpaane aate ho
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क्यूँ मेरी मैय्यत पे दीया जलाने आते हो
दिल के ज़ख्म अब क्यूँ सहलाने आते हो ?
नहीं भूल सकता तेरे दिए ज़ख्मों का वो सैलाब
अब क्यूँ मेरी सोयी रूह को तद्पाने आते हो |
__________हर्ष महाजन@