Friday, July 10, 2015

मेरा दिल मुझसे बदगुमां लेकिन

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मेरा दिल मुझसे बदगुमां लेकिन,
है ये कातिल पर रहनुमां लेकिन |
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हर पल रंगीन महफ़िलों पे फ़िदा,
हरसूं ज़ख्मों के हैं निशां लेकिन |

कितने हैं दर्द अश्क कहते हैं अब,
दिल में रोशन है इक शमा लेकिन |

हर इक सदमें में संग रोया बहुत,
मुझपे इतना था मेहरबां लेकिन |

कितने ही दर्द इश्क में था लिए,
बंद है दिल की अब जुबां लेकिन |

इश्की लाजवाब ग़ज़ल कैसे कहूँ,
न अश्क रुके न दर्द थमा लेकिन |

_______हर्ष महाजन