Monday, July 20, 2015

जो खुश्क हुए थे ज़ख्म, उनमें दर्द आज भी है



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जो खुश्क हुए थे ज़ख्म, उनमें दर्द आज भी है,
वो ज़िंदा हैं तो नहीं, दिल में भ्रम आज भी है | 

मैं जानता हूँ मुझे, उसका कभी इंकार न था,
मगर इस रूह पर, उसका वो क़र्ज़ आज भी है |


दिल बे-जुबां हुआ, शराब साज़-ए-दिल थी बनी,
शर्मिन्दा हूँ मुझे, बेशक वो मर्ज़ आज भी है |


तलाशता हूँ शहर, अज़ाब दिल का कहाँ मैं सहूँ,
किया जो मैंने मुझे, उसकी शर्म आज भी है | 


जलेगा सदियों तलक, इक दिया मज़ार पे अब,
पत्थर हुआ हूँ मगर, मेरा कर्म आज भी है |


हर्ष महाजन