Wednesday, March 26, 2014

हे कुन्तेय !! --- व्यंग

व्यंग
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कुंती
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हे कुन्तेय !!
तू धन्य है !!!
इतनी दूरदर्शिता !
तूने द्वापर में
ऐसा फैसला सुनाया ?
कलयुग कैसा होगा
ये था चेताया ?
सच
क्यों
किया जारी,
ऐसा तूने फरमान ,
कर दिया
नारीत्व का इस तरह अपमान ?

---------हर्ष महाजन