Saturday, March 9, 2013

उसने मेरी ख्वाहीशों को नजर-अंदाज़ कर दिया,

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उसने मेरी ख्वाहीशों को नजर-अंदाज़ कर दिया,
दिल जो उसके पास था टुकड़ों में आज़ाद कर दिया |
उदास नहीं हूँ मैं मगर उन यादों का करूँ भी तो क्या,
जिन्होंने मेरे दिल में रह कर मुझे कर्ज़दार कर दिया |

________________हर्ष महाजन