Thursday, July 19, 2012

जब से तेरे अश्क बहे मैंने तो लिखना छोड़ दिया

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जब से तेरे अश्क बहे मैंने तो लिखना छोड़ दिया
ये कलम कुछ और कहे मैंने तो लिखना छोड़ दिया ।

तोड़ दिए रिश्ते कलम से अहसास जिंदा हैं अभी
ज़ुल्म क्यूँ कोई रुख करे मैंने तो लिखना छोड़ दिया ।

काश कोई गिरेबां में अपनी झांक कर देखा करे
बिक रहा ईमान यहाँ मैंने तो लिखना छोड़ दिया ।

गद्दारों का और जफा का नाम शोहरत में लिखा            
सच्चाई दब गयी यहाँ मैंने तो लिखना छोड़ दिया ।

दुनिया की इस दौड़ में देखो खुद्दारी कहीं लुप्त हुई
मुस्कुराना भूले सब मैंने तो लिखना छोड़ दिया ।


__________________हर्ष महाजन