Saturday, April 12, 2014

दिल की सरहदों पर मुआमले हमेशां उलझा करते हैं

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दिल की सरहदों पर मुआमले हमेशां
उलझा करते हैं,
ये तो मकसद हैं दिलों के दिलों में ही सुलझा करते हैं ।

____________हर्ष महाजन



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Dil ki sarhadoN par muamle hameshaN uljha karte haiN,
Ye toh maksad haiN diloN ke diloN meiN hi suljha karte haiN.


___________Harash Mahajan

न जाने मेरी सरहदों को कब पार कर लिया उसने

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न जाने मेरी सरहदों को कब पार कर लिया उसने,
अनजाने में ही इक नयी दुनिया बसा ली है मैंने ।

-----------हर्ष महाजन

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Na jaane merii sarhadoN ko kab paar kar liya usne,
Anjaane meiN hi ik nayi duniyaaN basaa lii hai maine.

__________Harash Mahajan

खुदा का फज़ल है जो उसने दिलों की सरहदें बना डाली

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खुदा का फज़ल है जो उसने दिलों की सरहदें बना डाली,
मगर उस  की मर्जी बिना कहाँ दखल इन्सां का होता है ।

________________हर्ष महाजन


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Khuda ka fazal hai jo usne diloN kii sarhadeN bana daalii,
Magar Us ki marzi bina kahaN dakhal InsaaN ka hota hai.

_____________Harash Mahajan


अपने दिल की सरहदों पर उसने इस तरह बाढ़ लगाई है

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अपने दिल की सरहदों पर उसने इस तरह
बाढ़ लगाई है,
मेरे अहसासों पर न जाने कितनी असरदार चोटें आयी है ।

__________हर्ष महाजन

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Apne Dil ki sarhadoN par usne is tarah baaRh lagaayii hai
Mere ahsasoN par na jaane kitni asardaar choteN aayii haiN.

_________Harash Mahajan

शायरी का कलमकार से सिर्फ इतना सा वास्ता होता है

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शायरी का कलमकार से सिर्फ इतना सा वास्ता होता है, 
कागज़ पर जब भी लिखता है फकत इक हादसा होता है ।


------------हर्ष महाजन

मोहब्बत में अंदर ही अंदर अब पिसने लगी है वो

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मोहब्बत में अंदर ही अंदर अब पिसने लगी है वो,
जालिम है मेरे दिल के दरीचों से रिसने लगी है वो ।

-------------हर्ष महाजन

Thursday, April 10, 2014

कितने असद व्यापार होते हैं दिलों के, सब के बस की बात नहीं है

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कितने असद व्यापार होते हैं दिलों के, सब के बस की बात नहीं है,
इश्क का मसौदा है ये समझ सको तो ऎसी कोई सौगात नहीं है ।

----------------------हर्ष महाजन

उससे मुहब्बत तो बहुत करता हूँ पर इबादत नहीं

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उससे मुहब्बत तो बहुत करता हूँ पर इबादत नहीं,
ज़िन्दगी का ख्याल भी करता  हूँ पर इनायत नहीं ।
बहुत हुआ दर्द जब देखे मैंने गैरों के आंसू उसमें,
नफरत भी करता हूँ उससे बहुत पर शिकायत नहीं ।

-----------------हर्ष महाजन

Tuesday, April 1, 2014

जब से वो फलक से मेरे ख्वाबों में उतरने लगी

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Jab se wo falak se  mere khwaab meiN utarne lagi
Mere haathoN ki lakeereiN bhi khud sanwarne lagi.
Unse mlne ki dua .................lab pe ab na aa jaaye
Unki tasweereiN........ diwaaroN pe thi ubharne lagi.

जब से वो फलक से मेरे ख्वाबों में उतरने लगी,
मेरे हाथों की लकीरें भी........खुद सँवरने लगी ।
उनसे मिलने की दुआ....लब पे अब न आ जाए ,
उनकी तस्वीरें........दीवारों पे थी  उभरने लगीं ।

_________हर्ष महाजन

Sunday, March 30, 2014

काश तू मेरी किस्मत की लकीरों के अंदर देखती

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काश तू मेरी किस्मत की लकीरों के अंदर देखती,
गर होता इश्क़ मुझसे तो तू मुझमें समंदर देखती।


ज़िन्दगी तो तन्हां है यूँ ही अकेली नदिया सी मेरी,
गर होता हौंसला तुझमें तो मुझमें सिकंदर देखती । 


मुक़द्दर में चेहरों के...... बहुत से हजूम तो थे मेरे,
कोई होता चेहरा तुझसा तो मुझमें कलंदर देखती । 


छोड़ दिया सब कुछ मैंने देखकर गैर हाज़िरी तेरी,
मुक़द्दर जो होता तेरा…तो मुझमें पैगम्बर देखती ।

किस तरह निभाऊंगा ये सुफिआना अंदाज़ बिन तेरे,
काश होता कोई वज़ूद तेरा तो मुझमें बवंडर देखती ।


_____________हर्ष महाजन

Saturday, March 29, 2014

किस हक़ से इश्क का नया दौर चला सकते हैं हम

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किस हक़ से इश्क का नया दौर चला सकते हैं हम,
इक आशियाँ जो दिल में है कैसे जला सकते हैं हम ।
उठाने को सितम तो सभी मंज़ूर है मुझे 'हर्ष'  मगर,
हाथों में नए दोस्त की लकीर बना सकते हैं हम ।


---------------हर्ष महाजन

Kis haq se Ishq ka naya dour chala sakte haiN ham,
Is aashiyaN jo dil meiN hai kaise jalaa sakte haiN ham.
Uthaane ko sitam to sabhi manzoor haiN mujhe'harash' par,
haathoN meiN naye dost ki  lakeer bana sakte haiN.


______________Harash Mahajan

दिलों के शौक महफ़िलों में आके भूल गए



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दिलों के शौक महफ़िलों में आके भूल गए,
तराने यूँ चले कि...…साजों के असूल गए ।
कभी चले है बर्तनों पे .…...जैसे उँगलियाँ ,
लगा यूँ ऐसे जैसे बचपनों.…में  झूल गए ।
 


DiloN ke shouk mahfiloN meiN aake bhool gaye,
Tarane yuN chale ki saazoN ke asool gaye,
Kabhi chale haiN bartanoN pe jaise ungliyaaN,
laga yuN aise jaise bachpanoN meiN jhool gaye.


_________________Harash Mahajan

कोई तो है ऐसा जिसे ज़िदगी मानता हूँ मैं

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कोई तो है ऐसा जिसे ज़िदगी मानता हूँ मैं,
पहचानता तो नहीं यकीनन जानता हूँ मैं ।

असर तो है उनकी जुल्फों से आती हवाओं में,
देखा नहीं है उनको पर अपना मानता हूँ मैं ।




koii toh hai aisa jise zindagi maanta huN maiN,
pahchanta to nahiN yaqeenan jaanta huN maiN.
Asar toh hai unki zulfoN se aati hawaoN meiN,

Dekha nahiN hai unko par apna maanta huN maiN


_______________Harash Mahajan

Wednesday, March 26, 2014

क्यूँ कभी तेरे दिल को मेरे दर्द का अहसास नहीं होता

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KyuN kabhi tere dil ko mere dard ka ahsaas nahiN hota,
Mujhse is tarah dillagi karogi
kabhi vishwas nahiN hota .

क्यूँ कभी तेरे दिल को .....मेरे दर्द का अहसास नहीं होता,
मुझसे इस तरह दिल्लगी करोगी
कभी विश्वास नहीं होता ।

_________________हर्ष महाजन

Sunday, March 23, 2014

मोदी हिन्द की आन का, एकहू ही फरमान

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मोदी हिन्द की आन का, एकहू ही फरमान,
जनता हिंदुस्तान की, कस रही अब कमान ।
कस रही अब कमान,..फिर भ्रष्टाचार घटेगा ,
खिलेगा फूल कमल..... यहां से हाथ घटेगा ।
कहे 'हर्ष' दो बदल,.....मोनि बाबा की गोदी ,
हाथ में ले लो कमल,.. तभी आएगा मोदी ।

____________हर्ष महाजन

वो शख्स सवालों में नज़र आने लगे



वो शख्स सवालों में नज़र आने लगे,
जाने क्यूँ वो खुद से ही बतियाने लगे ।

बिन मिले लगा कर तोहमतें चेहरों पे,
बे-सबब अंदाज़-ए -बयाँ बताने लगे ।

किसी तरह झांकें वो दिल के दरीचों में,
शायद खुद ये रिश्ता समझ आने लगे ।

कब तक चलेंगे रिश्ते उधारी समझ से ,
इक इक कर शायद इन को गंवाने लगे ।

नहीं होता इक सा इम्तिहान सबका यारों
जब आएगा समझ शायद पछताने लगे ।

___________हर्ष महाजन

Hi

हेलो

Hi

हैलो 

राह

Thursday, March 13, 2014

उनका हर जुनून मेरे लिए कहर का सबब है

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उनका हर जुनून मेरे लिए कहर का सबब है,
अबकि उनका प्यार मेरी हस्ती ही बदल गया ।
किस तरह मिटाऊँ अब हाथ की नयी लकीरों को ,
मेरी ज़िंदगी में पांब रखते ही सब खलल गया ।

–--–---–------हर्ष महांजन