Wednesday, August 7, 2013

ज़ख्मों से सीना मेरा छलनी हुआ जाता है 'हर्ष'

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ज़ख्मों से सीना मेरा छलनी हुआ जाता है 'हर्ष',
कम्बखत अब दर्द भी परेशान हैं कि कहाँ से उठूं |

_____________हर्ष महाजन